गोल्डीलॉक्स जोन क्या होता है

गोल्डीलॉक्स जोन क्या होता है

किसी तारे के बिल्कुल पास का अंतरिक्ष या जगह बहुत ज्यादा गर्म होती है क्योंकि वह तारे के बिल्कुल पास है लेकिन अगर हम तारे से बहुत ज्यादा दूर चले जाएंगे तो वहां का तापमान बहुत कम होगा | तारे के पास की जगह पर गर्मी के कारण वहां हमें पानी सिर्फ गैसीय अवस्था में ही मिलेगा लेकिन अगर हम ज्यादा दूर चले जाएंगे तो पानी हमें कम तापमान के कारण जमा हुआ मिलेगा | लेकिन अब हम ऐसी जगह चलते हैं जहां तापमान ना तो ज्यादा है और ना ही ज्यादा कम मतलब यह कि तापमान इस जगह पर बिल्कुल सामान्य है और यहां पानी तरल रूप में मिल सकता है , इसी जगह को हम गोल्डीलॉक्स जोन कहते हैं | गोल्डीलॉक्स जोन किसी तारे के आसपास ऐसा इलाका होता है जहां के ग्रहों पर पानी हमें तरल रूप में मिल सकता है |

क्यों जरूरी है गोल्डीलॉक्स जोन

माना जाता है कि हमारे जीवन की शुरुआत पानी से ही हुई थी | जब पृथ्वी का जन्म हुआ उस समय पृथ्वी बहुत ज्यादा गर्म थी और शायद उस समय पृथ्वी पर पानी भी ना रहा हो और इसी कारण शायद उस समय पृथ्वी पर जीवन भी नहीं था | पृथ्वी पर जीवन की शुरूआत तो सिर्फ कुछ ना कुछ लाख साल पहले ही हुई है  | इससे हम यह अंदाजा लगा सकते हैं कि जब पृथ्वी पर पानी तरल अवस्था में आ गया और यहां का वातावरण बिल्कुल जीवन के लायक हो गया तो पृथ्वी पर जीवन  शुरू हुआ |

ठीक इसी प्रकार हमारे जीवन के लिए पानी तरल अवस्था में होना बेहद जरूरी है और किसी ग्रह पर पानी तरल अवस्था में तभी होगा जब वह ग्रह अपने तारे से बिल्कुल सही दूरी पर होगा जहां ना तो ज्यादा गर्मी हो और ना ही ज्यादा ठंड और इस जगह को हम गोल्डीलॉक्स जोन कहते हैं | गोल्डीलॉक्स जोन में किसी ग्रह पर पानी तरल अवस्था में मिल जाता है जैसे कि हमारी पृथ्वी हमारी पृथ्वी सूर्य से बिल्कुल सही दूरी पर है यहां ना तो ज्यादा गर्मी है कि पृथ्वी पर पानी भाप बनकर उड़ जाए और ना ही ज्यादा ठंड कि पृथ्वी पर पानी जम ही जाए यहां का तापमान और वातावरण की परिस्थितियां बिल्कुल सही है जो कि यहां मौजूद पानी को तरल अवस्था में रखते हैं |

गोल्डीलॉक्स जोन कहां पर स्थित होता है

अगर हम अपने सौरमंडल की बात करें तो हमारी पृथ्वी हमेशा गोल्डीलॉक्स जोन में ही रहती है लेकिन हमारा पड़ोसी ग्रह मंगल भी गोल्डीलॉक्स जोन में है लेकिन वहां पानी तरल रूप में नहीं मिलता है | हमारे सौरमंडल को छोड़कर अगर हमअपनी आकाशगंगा में किसी और सौरमंडल की बात करें तो गोल्डीलॉक्स जोन किसी तारे के आकार पर निर्भर करता है | अगर तारा बहुत ज्यादा बढ़ा है तो उसका गोल्डीलॉक्स जोन भी ज्यादा बड़ा होगा और तारे से ज्यादा दूर भी होगा लेकिन अगर तारा छोटा है तो उसका गोल्डीलॉक्स जोन उसके बहुत नजदीक से शुरू होकर कुछ ही दूरी तक रहेगा | बड़े तारों के आसपास के ग्रहों पर जीवन होने  की ज्यादा संभावना रहती है क्योंकि बड़ी तारों का गोल्डीलॉक्स जोन हमेशा बड़ा होता है और वह बहुत दूर तक फैला होता है | छोटे तारों के केस में ऐसी संभावना बहुत ज्यादा कम होती है |

क्या गोल्डीलॉक्स जोन जीवन होने का एक संकेत है

किसी ग्रह का गोल्डीलॉक्स जोन में होना यह साबित नहीं करता कि वहां जीवन पूरी तरह से संभव है या नहीं | गोल्डीलॉक्स जोन तारे से वह दूरी है जहां पानी हमें तरल अवस्था में मिल सकता है इस जगह पर तापमान ना तो ज्यादा होता है और ना ही कम | लेकिन किसी ग्रह पर जीवन का संभव होना वहां के वातावरण और परिस्थितियों पर निर्भर करता है चाहे कोई ग्रह गोल्डीलॉक्स जोन में है या नही | लेकिन अगर वहां का वातावरण बहुत पतला है और वातावरण के साथ साथ उस ग्रह का अगर गुरुत्वाकर्षण भी बहुत कम है तो वहां पानी तरल रूप में मौजूद हो ही नहीं सकता , पानी जल्दी ही भाप बनकर उड़ जाएगा क्योंकि उस  पानी को रोकने के लिए वातावरण और गुरुत्वाकर्षण दोनों ही मौजूद नहीं है | लेकिन अगर किसी ग्रह का वातावरण बहुत ज्यादा मोटा है और वहां का वातावरण बिल्कुल हमारे शुक्र ग्रह की तरह है तो वहां भी पानी हमें तरल अवस्था में नहीं मिल सकता क्योंकि उस ग्रह पर मौजूद पानी वहां की गर्मी से भाप बनकर उड़ जाएगा |  दरअसल यह दोनों उदाहरण हमारे ही सौरमंडल के हैं शुक्र ग्रह भी हमारे सौरमंडल के गोल्डीलॉक्स जोन के बिल्कुल नजदीक है लेकिन वहां पानी तरल अवस्था में नहीं पाया जाता और दूसरा उदाहरण  मंगल ग्रह का है जो पूरी तरह से गोल्डीलॉक्स जोन में है लेकिन वहां का वातावरण बहुत पतला है जो कि उसकी सतह से उड़ रहे पानी को रोककर नहीं रख पाता और वहां का गुरुत्वाकर्षण बल भी इतना ज्यादा नहीं है कि वह उसकी सतह को छोड़कर जा रहे पानी के मॉलिक्यूल  को पकड़ कर रख सके | इसलिए किसी ग्रह का गोल्डीलॉक्स जोन में होना इस बात की पुष्टि नहीं करता है कि उस ग्रह पर जीवन संभव हो |

 गोल्डीलॉक्स जोन में जीवन

वैज्ञानिकों ने हमारे सौरमंडल से बाहर अनेकों जगह पर तारों के आसपास अनेकों गोल्डीलॉक्स जोन  ढूंढ लिए हैं , जहां तापमान जीवन के लिए बिल्कुल अनुकूल है , और बड़ी बात तो यह है कि उस गोल्डीलॉक्स जोन में ग्रह भी हैं जो कि बिल्कुल हमारी पृथ्वी की ही तरह है जिन्हें हम अक्सर सुपर अर्थ कहते हैं |  नासा ने भी ऐसी एक घोषणा की थी कि उन्होंने Trappist-1 नाम का एक तारा ढूंढा है जिसके गोल्डीलॉक्स जोन में लगभग 7 ग्रह आते हैं यह सातों ग्रह अपने तारे Trappist-1 के बेहद करीब है और यह सभी ग्रह एक दूसरे के भी बहुत ज्यादा नजदीक हैं लेकिन गोल्डीलॉक्स जोन में होने के कारण जीवन होने की एक बड़ी संभावना है | गोल्डीलॉक्स में किसी ग्रह पर जीवन होने की संभावना तभी होती है जब वहां पर भी वातावरण की परिस्थितियां जीवन के लिए अनुकूल हो और हमने Trappist-1  के अलावा भी अनेकों ऐसे  तारों को ढूंढ लिया है जहां के ग्रहों पर जीवन के लिए परिस्थितियों बिल्कुल अनुकूल है और वह  गोल्डीलॉक्स जोन में भी हैं |

 

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