मंगल ग्रह | Mars planets Facts in hindi

मंगल ग्रह हमारे सूर्य से सौर मंडल का चौथा ग्रह है और यह हमारे सौर मंडल का दूसरा सबसे छोटा ग्रह है, मंगल को लाल ग्रह भी कहा जाता है क्योंकि लौह ऑक्साइड बहुत बड़ी मात्रा में पाया जाता है। हम मनुष्य मंगल ग्रह पर जीवन की संभावनाओं की खोज कर रहे हैं और यही कारण है कि मंगल ग्रह हमारे लिए एक दिलचस्प ग्रह है।

संरचना

मंगल ग्रह आकार में बहुत छोटा है यह हमारे सौरमंडल का दूसरा सबसे छोटा ग्रह है इसका आकार हमारी पृथ्वी के डायमीटर से आधा है | मंगल मंगल ग्रह का सरफेस एरिया हमारी पृथ्वी पर पाई जाने वाली सूखी जगह के लगभग बराबर है| ग्रह का घनत्व हमारी पृथ्वी के घनत्व से कम है और इसलिए मंगल ग्रह का भार भी हमारी पृथ्वी का सिर्फ 11% ही है| मंगल ग्रह पर गुरुत्वाकर्षण प्रभाव हमारी पृथ्वी की तुलना में सिर्फ 38% ही है| मंगल ग्रह की सतह भी चट्टानी है,  इस ग्रह की कोर Dense Metallic Material  से बनी हुई है और इसके ऊपर कम घनत्व  वाले मेटेरियल लगे हुए हैं| माना जाता है कि इस की कोर में आयरन निकल मुख्य रूप से पाए जाते हैं और इसके साथ ही 16 से 17% सल्फर भी इस की कोर में पाया जाता है| इसकी कोर के ऊपर, सिलिकेट से बनी हुई मेंटल की परत है जो कि हमारी पृथ्वी की ही तरह मंगल पर भी टेक्टोनिक प्लेट्स का निर्माण करती है | मंगल ग्रह की क्रस्ट पर आयरन, मैग्नीशियम, एलुमिनियम, कैल्शियम और पोटैशियम जैसे पदार्थ पाए जाते हैं| मंगल ग्रह की क्रस्ट की एवरेज चौड़ाई लगभग 50 किलोमीटर है और यह चौड़ाई बढ़कर अधिकतम 125 किलोमीटर तक भी चली जाती है अगर पृथ्वी से इसकी तुलना की जाए तो हमारी पृथ्वी की क्रस्ट की एवरेज चौड़ाई सिर्फ 40 किलोमीटर ही है | मंगल ग्रह की सतह पर अनेकों प्रकार की खनिज पाए जाते हैं जिनमें सिलिकॉन, ऑक्सीजन, धातुएं और अन्य एलिमेंट्स भी शामिल है इसकी सतह मुख्य रूप से रॉक्स की बनी हुई है जिस में सिलिका की रॉक मुख्य है

मैग्नेटिक फील्ड

मंगल ग्रह पर मैग्नेटिक फील्ड होने के कोई भी सबूत नहीं मिले हैं लेकिन ऑब्जरवेशन से यह पता चला है कि इस ग्रह के सतह के कुछ इलाके ऐसे हैं जो Magnetize है |

सतह

फीनिक्स लैंडर के अध्ययन से हमें यह पता चला कि मंगल ग्रह की मिट्टी एल्कलाइन ( ALKALINE ) है और इसमें मैग्नीशियम, सोडियम, पोटेशियम और क्लोरीन जैसे तत्व भी पाए जाते हैं| ये तत्व हमारी पृथ्वी की मिट्टी में भी पाए जाते हैं जो कि पेड़ पौधों के लिए जरूरी तत्व है| फीनिक्स लैंडर ने  मंगल ग्रह की मिट्टी की PH वैल्यू 7.7 होने का अनुमान लगाया| मंगल ग्रह का उत्तरी गोलार्ध पूरी तरह से समतल मैदानी इलाका है| लेकिन इसका दक्षिणी गोलार्ध पूरी तरह से और समतल धरातल है और यह उत्तरी गोलार्ध से ऊंचा भी है| मंगल ग्रह का उत्तरी गोलार्ध पूरी तरह से इंपैक्ट क्रेटर ज्वालामुखी और खड्डों से भरा पड़ा है |

मंगल ग्रह पर पानी

Mars Planet

हालांकि मंगल ग्रह पर पानी का आस्तित्व नहीं हो सकता क्योंकि मंगल ग्रह का Atmospheric pressure बहुत कम है जो कि हमारी पृथ्वी की तुलना में सिर्फ 1% ही है| लेकिन इसके बावजूद भी मंगल ग्रह के ध्रुवों पर Ice Caps पाई जाती हैं जिनमें बहुत ज्यादा मात्रा में पानी पाया जा सकता है| मंगल ग्रह के दक्षिणी ध्रुव की Ice caps पर इतना ज्यादा पानी हो सकता है कि अगर वहां की बर्फ पिघल जाए तो वह पूरे मंगल ग्रह को लगभग 11 मीटर नीचे पानी में डुबो सकती है| मंगल ग्रह पर पाई जाने वाली यह आइस कैप्स परमानेंट पोलर कैप्स है| मंगल ग्रह के ध्रुवों पर पाई जाने वाली आइस कैप्स पूरी तरह से पानी से नहीं बनी हुई हैं | इन कैप्स में लगभग 70% पानी मौजूद हो सकता है और लगभग 30% कार्बन डाइऑक्साइड होती है, जो कि पानी के ऊपर एक मोटी परत बना लेती है जिससे बर्फ पिघलती नहीं है| जब गर्मियों में ध्रुवों पर सूर्य की रोशनी पड़ती है तब कार्बन डाइऑक्साइड सब्लिमेशन प्रक्रिया के कारण सीधे गैस में बदल जाता है तब मंगल ग्रह पर भी हमारी पृथ्वी की ही तरह पानी और धूलकण वाष्पित होकर हवा में उड़ जाते हैं, और एक जगह से दूसरी जगह चले जाते हैं और इस प्रकार मंगल ग्रह पर भी हमारी पृथ्वी की ही तरह बादल बनते हैं| ऑपर्चुनिटी रोवर ने हमे मंगल पर बने  हुए बादलों की तस्वीरें हमें भेजी |

ज्वालामुखी

ओलंपस मोंस मंगल ग्रह पर सबसे ऊंची चोटी है जोकि माउंट एवरेस्ट से लगभग 3 गुना ज्यादा ऊंची है जोकि हमारी पृथ्वी पर सबसे ऊँची चोटी है| ओलंपस मोंस की ऊंचाई 21 से 27 किलोमीटर तक हो सकती है, वही माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई सिर्फ 8.8 किलोमीटर है| ओलंपस मोंस इतना विशाल है कि इसमें अन्य बड़े बड़े ज्वालामुखी भी बने हुए हैं, यह ज्वालामुखी लगभग 600 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है| लेकिन ओलंपस मोंस वर्तमान में सक्रिय ज्वालामुखी नहीं है|

मंगल ग्रह की घाटी

मंगल ग्रह पर हमारे सौरमंडल की सबसे बड़ी और गहरी घाटी बनी हुई है जिसका नाम है VALLES MARINERIS |  यह घाटी लगभग 4000 किलोमीटर लंबी 700 किलोमीटर चौड़ी और 7 किलो मीटर गहरी है| यह घाटी इतनी बड़ी है कि यह मंगल ग्रह के लगभग 20% सरकमफेरेंस को कवर करती है या फिर हम ऐसा कह सकते हैं कि इस घाटी ने पूरे मंगल ग्रह को दो भागों में बांट रखा है | हमारी पृथ्वी पर पाई जाने वाली सबसे गहरी घाटियों में से एक ग्रैंड कैनियन से अगर मंगल ग्रह की इस घाटी की तुलना की जाए तो हमारी पृथ्वी पर पाई जाने वाली यह घाटी बहुत छोटी पड़ जाती है | पृथ्वी पर पाई जाने वाली घाटी ग्रैंड कैनियन सिर्फ 446 किलोमीटर लंबी है और इसकी गहराई सिर्फ 2 किलोमीटर ही है जबकि मंगल ग्रह पर पाई जाने वाली घाटे की लंबाई 4000 किलोमीटर है और 7 किलोमीटर गहरी है| इस घाटी के बनने के पीछे भी कई कारण हो सकते हैं जिन पर अभी बहस चल रही है ,कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह घाटी मंगल ग्रह पर किसी छुद्र ग्रह के टकराने से बनी होगी लेकिन वहीं दूसरी तरफ कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि जब मंगल ग्रह जियोलाजिकल एक्टिव था तब यह घाटी मंगल ग्रह पर ज्वालामुखियों के फटने से बनी होगी |

वातावरण

मंगल ग्रह पर बहुत पतला वातावरण मौजूद है  मंगल ग्रह के इस वातावरण में एटमोस्फियरिक प्रेशर हमारी पृथ्वी के मुकाबले सिर्फ 1% ही है , इस के वातावरण में लगभग 96 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड , 3.8 2% आर्गन और नाइट्रोजन आदि पाए जाते हैं इसके अलावा ऑक्सीजन और वाटर के ट्रेसेस भी मंगल ग्रह पर पाए गए | मंगल ग्रह पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के मुकाबले सिर्फ 38 प्रतिशत ही है और इसी कारण मंगल  ग्रह का वातावरण पृथ्वी के वातावरण के मुकाबले अधिक ऊंचाई तक फैला हुआ है मंगल ग्रह के वातावरण लगभग 10.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है हमारी पृथ्वी का वातावरण सिर्फ 6 किलोमीटर की ऊंचाई तक है |  मंगल ग्रह पर सर्दियों में इसके ध्रुवों पर तापमान लगभग -143 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है और गर्मियों में इसके भूमध्य भाग पर तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है | मंगल ग्रह के सबसे कम और अधिकतम तापमान में बहुत ज्यादा फर्क है और यह इसलिए है क्योंकि मंगल ग्रह का वातावरण बहुत पतला है और यह सूर्य से आने वाली गर्मी को रोक कर नहीं रख पाता |

मंगल ग्रह पर तेज हवाएं चलती हैं और इसके साथ-साथ मंगल ग्रह पर रेत के तूफ़ान भी आते हैं | मंगल ग्रह पर आने वाले तूफान छोटे भी होते हैं और बड़े  भी |  मंगल ग्रह पर आने वाले छोटे तूफान इसके छोटे इलाके में ही रहते हैं लेकिन दूसरी तरफ मंगल ग्रह पर आने वाले बड़े तूफान पूरे मंगल ग्रह को ही अपनी चपेट में ले लेते हैं, पूरा मंगल ग्रह इस तूफानी धुंध से ढक जाता है मंगल ग्रह पर आने वाले यह तूफान हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े तूफान हैं |  मंगल ग्रह पर उठने वाले रेत के यह तूफान 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार तक पहुंच जाते हैं |

मौसम

मंगल ग्रह अपनी एक्सिस  पर लगभग 25. 19 डिग्री झुका हुआ है जो कि हमारी पृथ्वी के लगभग बराबर है और इसी कारण मंगल ग्रह पर बिल्कुल हमारी पृथ्वी की ही तरह मौसम बनते हैं | मंगल ग्रह के मौसम पृथ्वी के मुकाबले 2 गुना ज्यादा बड़े होते हैं क्योंकि मंगल ग्रह  सूर्य से हमारी पृथ्वी के मुकाबले ज्यादा दूर है |

ऑर्बिट और रोटेशन

मंगल ग्रह सूर्य से लगभग 230 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | यह सूर्य का  एक चक्कर पूरा करने में 687 दिनों का समय लेता है और मंगल ग्रह पर एक दिन हमारी पृथ्वी के मुकाबले थोड़ा ही बड़ा होता है | मंगल ग्रह पर 1 दिन 24 घंटे 39 मिनट और 35.24 4 सेकंड का होता है | मंगल ग्रह पर 1 साल हमारी पृथ्वी के मुकाबले 1 साल 320 दिन और 18.2 घंटों का होता है |

उपग्रह

मंगल ग्रह के दो कुदरती उपग्रह हैं जो कि आकार में हमारे चंद्रमा से काफी छोटे हैं | इसके एक उपग्रह का नाम है वह फ़ोबोस जो कि 22 किलोमीटर का है और दूसरे उपग्रह का नाम डीमोस है जो कि कुल 12 किलोमीटर का ही है | मंगल ग्रह के उपग्रहों की बनावट देखकर ऐसा लगता है कि यह कोई क्षुद्रग्रह हो सकते हैं जोकि मंगल ग्रह की ग्रेविटी द्वारा पकड़ लिए गए हैं | मंगल ग्रह के उपग्रह सन 1877 में ASEF HALL  द्वारा खोजे गये | मंगल ग्रह के यह दोनों उपग्रह हमारे सौरमंडल में किसी ग्रह से सबसे कम दूरी से परिक्रमा करने वाले  उपग्रहों में से एक है , उदाहरण के लिए मंगल ग्रह का उपग्रह फोबोस सिर्फ 6000 किलोमीटर की दूरी सही मंगल ग्रह का चक्कर लगा रहा है |फोबोस 11 घंटे में मंगल ग्रह का एक चक्कर पूरा कर लेता है वही डीमोस 30 घंटों में मंगल ग्रह का एक ऑर्बिट पूरा करता है | फोबोस  लगातार मंगल ग्रह की ओर खींचता चला आ रहा है क्योंकि फोबोस शुरू से ही Synchronous Altitude से नीचे है जिस कारण मंगल ग्रह की ग्रेविटी और Tidal Forces लगातार इसे अपनी और खींच रही है | आने वाले लगभग 5 मिलियन सालों में यह उपग्रह मंगल ग्रह के वातावरण से टकरा जाएगा और इसके चारो और इसके मलबे से मंगल के चारो ओर एक रिंग बन जायेगी |

जीवन

मंगल ग्रह हमारे सौर मंडल के गोल्डीलॉक्स जोन में है मतलब यह कि मंगल ग्रह पर जीवन होने की संभावना है | लेकिन मंगल ग्रह पर हमारे रहने लायक वातावरण मौजूद नहीं है | ऐसा माना जाता है कि करोड़ों अरबों साल पहले मंगल ग्रह पर भी पृथ्वी की ही तरह जीवन रहा होगा पर धीरे-धीरे इसका वातावरण बदलता गया और मंगल ग्रह से जीवन खत्म होता गया | ऐसा माना जाता है कि लगभग 4 बिलियन साल पहले मंगल ग्रह का Magnetosphere अचानक गायब हो गया जिसके कारण सूर्य की हानिकारक किरणें और रेडिएशन इस के वातावरण में घुस आए और मंगल ग्रह पर जीवन के सभी नामोनिशान समाप्त हो गए | मंगल ग्रह से कोई बड़ा उपग्रह या ग्रह टकराया होगा जिसके कारण इसका Magnetosphere अचानक गायब हो गया  | Magnetosphere के गायब होने से इसका वातावरण भी अंतरिक्ष में उड़ गया जिसके प्रमाण हमें मार्स ग्लोबल सर्वेयर और मार्स एक्सप्रेस से मिले जिन्होंने मंगल ग्रह के वातावरण से स्पेस की तरफ जा रहे पार्टिकल्स को डिटेक्ट किया | मंगल ग्रह पर पानी तरल रूप में मौजूद नहीं है  और मंगल ग्रह पर ऑक्सीजन भी प्रचुर मात्रा में नहीं है , इसलिए मंगल ग्रह पर फिलहाल जीवन की संभावना ना के बराबर है | मंगल ग्रह पर सूर्य का रेडिएशन भी एक बड़ा खतरा है जिसने शायद मंगल ग्रह पर  पनपे  अरबों साल पहले के जीवन को भी मिटा दिया और आज भी यह मानव जीवन के लिए मंगल ग्रह पर एक बड़ा खतरा है|