शुक्र ग्रह | Venus facts in hindi

शुक्र ग्रह सूर्य से दूसरा ग्रह है  | यह एक चट्टानी ग्रह है शुक्र ग्रह और हमारी पृथ्वी में अनेकों समानताएं देखी गई और इसीलिए शुक्र ग्रह को हमारी पृथ्वी का सिस्टर प्लेनेट भी कहा जाता है | शुक्र ग्रह को सुबह और शाम को आसमान में चमकते हुए देखा जा सकता है जो कि बिल्कुल एक तारे की तरह चमकता है इसी कारण शुक्र ग्रह को सुबह और शाम का तारा भी कहा जाता है |

संरचना

शुक्र ग्रह हमारे सौर मंडल के चार चट्टानी ग्रहों में से एक है मतलब यह कि शुक्र ग्रह की सतह भी हमारी  पृथ्वी की सतह की ही तरह ठोस है | शुक्र ग्रह के वातावरण में घने बादलों के कारण इसकी सतह दिखाई नहीं देती है , लेकिन बीसवीं सदी के बाद शुक्र ग्रह की ओर भेजे गए कई  मिशन ऐसे थे जिन्होंने शुक्र ग्रह की सतह को मैप किया मैगेलन ( Magellan ) मिशन जो कि 1990-91 में भेजा गया , जिसने हमें यह बताया कि शुक्र ग्रह की सतह पर बहुत ज्यादा मात्रा में ज्वालामुखी मौजूद है और इसके वातावरण मेंजहरीली गैस है जैसे कि सल्फर आदि की मात्रा बहुत ज्यादा है |

शुक्र ग्रह की सतह का लगभग 80% भाग ज्वालामुखी मैदानों से घिरा हुआ है जिसमें कि 70% भाग पर अनेकों तरह  की संरचनाएं देखने को मिलती हैं और वही इसका 10% भाग पूरी तरह से मैदानी इलाका है | शुक्र ग्रह के दो मुख्य महाद्वीप है इसके उत्तरी महाद्वीप को इस्तार टेरा के नाम से जाना जाता है जो कि आकार में ऑस्ट्रेलिया के बराबर है | शुक्र ग्रह  की सबसे ऊंची चोटी जिसका नाम मैक्सवेल मोंट्स है यह चोटी भी शुक्र ग्रह के इसी उत्तरी महाद्वीप इस्तार टेरा पर स्थित है |  शुक्र ग्रह के दूसरे महाद्वीप को इस इफ्रोडाईट टेरा के नाम से जाना जाता है जो कि इस के दक्षिणी इलाके में स्थित है और यह शुक्र ग्रह के मुख्य महाद्वीपों में सबसे बड़ा है और इसका आकार साउथ अमेरिका के बराबर है |

शुक्र ग्रह की सतह पर बने गड्ढे और क्रेटर के अध्ययन से यह पता लगाया गया कि इस ग्रह की सतह लगभग 300 से 600 मिलियन साल पहले बनी थी जो कि हमारे सौरमंडल की आयु के हिसाब से बहुत कम है | शुक्र ग्रह की सतह पर इसके 100  किलोमीटर के इलाके में लगभग 167 बड़े ज्वालामुखी पाए गए हैं  | शुक्र ग्रह के वातावरण में हमें कुछ तथ्य से मिले जो  इस ओर इशारा करते हैं कि इस पर बने हुए ज्वालामुखी अभी भी सक्रिय हैं , सोवियत के वेनेरा प्रोग्राम के दौरान वेनेरा-9  ने शुक्र ग्रह की सतह पर बिजली चमकने की घटना को डिटेक्ट किया और इसके बाद वेनेरा-12 और कई और प्रोब्स  ने भी ठीक इसी तरह शुक्र ग्रह की सतह पर बिजली चमकने की घटना को डिटेक्ट किया | इससे यह अंदाजा लगाया गया कि यह बिजली इसके सक्रिय ज्वालामुखियों के कारण चमकती है |

शुक्र ग्रह की सतह पर बने हुए खड्डे और क्रेटर 3 किलोमीटर से लेकर 280 किलोमीटर तक के डायमीटर के हैं लेकिन इनमें से कोई भी क्रेटर 3 किलोमीटर से छोटा नहीं है क्योंकि शुक्र ग्रह से टकराने वाले आकाशीय पिंड जो लगभग 50 किलोमीटर के होते हैं वह इस के घने वातावरण से टकराकर पूरी तरह से जल जाते हैं और इनकी गति भी बहुत कम हो जाती है जो या तो इसकी सतह तक पहुंचते ही नहीं है और अगर पहुंच भी जाते हैं तो कोई बड़ा क्रेटर नहीं बना पाते |

इंटरनल स्ट्रक्चर

शुक्र ग्रह बिल्कुल हमारी पृथ्वी की तरह दिखाई देता है इसका आकार और बनावट बिल्कुल हमारी पृथ्वी की तरह है और यह भी माना जाता है कि इसका अंदरूनी हिस्सा भी बिल्कुल हमारी पृथ्वी की तरह होना चाहिए | इसलिए यह माना जाता है कि शुक्र ग्रह भी तीन परतों से बना हुआ है सबसे ऊपर इसकी क्रस्ट है इसके नीचे मेंटल और  इसके केंद्र में कोर है |  शुक्र ग्रह पर टेक्टोनिक प्लेट्स होने के कोई भी प्रमाण नहीं पाए गए |

वातावरण

Venus Planet
Venus planet without Clouds

शुक्र ग्रह का वातावरण बहुत ही घना  है इसके वातावरण में लगभग 96.5 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड पाई जाती है इसके अलावा 3.5% नाइट्रोजन और अन्य  गैसों के ट्रेसेस भी पाए जाते हैं जिनमें सल्फर डाइऑक्साइड मुख्य है | शुक्र ग्रह के वातावरण का घनत्व  इसकी सतह के ठीक ऊपर 65 किलोग्राम प्रति मीटर क्यूब है जो कि हमारी पृथ्वी के वातावरण के घनत्व से 50 गुना ज्यादा है | इसके अलावा शुक्र ग्रह के वातावरण में पाई जाने वाली गैसों  का कुल भार हमारी पृथ्वी पर पाई जाने वाली गैसों के मुकाबले लगभग 93 गुना ज्यादा है | शुक्र ग्रह पर एटमोस्फियरिक प्रेशर हमारी पृथ्वी के मुकाबले 92 गुना ज्यादा है , हमारी पृथ्वी पर इतना ज्यादा प्रेशर समुंदर में 1 किलोमीटर नीचे जाने पर मिलता है | इसके वातावरण 96% कार्बन डाइऑक्साइड होने के कारण शुक्र ग्रह पर हमारे सौरमंडल का सबसे ताकतवर ग्रीन हाउस इफेक्ट पैदा होता है जो कि इसके वातावरण के तापमान को कम से कम  462 डिग्री सेल्सियस तक ले जाता है | बुध ग्रह सूर्य के सबसे नजदीक है और शुक्र ग्रह सूर्य से बुध ग्रह के मुकाबले कहीं ज्यादा दूर है , शुक्र ग्रह बुध ग्रह के मुकाबले सूर्य से सिर्फ 25% सोलर रेडिएशन ही प्राप्त करता है लेकिन फिर भी शुक्र ग्रह का तापमान बुध ग्रह के मुकाबले कहीं ज्यादा है बुध ग्रह पर अधिकतम तापमान 420 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया और सबसे कम तापमान-220 डिग्री रिकॉर्ड किया गया जोकि इसके रात वाले हिस्से में होता है , वही शुक्र ग्रह पर सबसे कम तापमान इसकी सबसे ऊंची चोटी मैक्सवेल मोंट्स पर रिकॉर्ड किया गया जहां का तापमान 380 डिग्री सेल्सियस तक रहता है और शुक्र ग्रह पर  एवरेज तापमान 462 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है जोकि बुध ग्रह के तापमान से कहीं ज्यादा है |

शुक्र ग्रह पर तापमान लगभग एक समान ही रहता है क्योंकि यहां पर चलने वाली हवाएं बहुत धीमी गति से चलती है , इसके वातावरण का घनत्व बहुत ज्यादा है हवाओं के साथ साथ शुक्र ग्रह की सतह पर पड़े धूलकण भी इसके साथ ही चलते हैं जो कि गर्मी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में सहायक होते हैं और इसी वजह से शुक्र ग्रह  पर हर जगह तापमान लगभग एक जैसा ही रहता है फिर चाहे शुक्र ग्रह पर दिन का समय हो या रात का,चाहे वह जगह  सूर्य के सामने हो या फिर कोई और |

ऑर्बिट एंड रोटेशन

शुक्र ग्रह हमारे सूर्य से 108 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह अपने और ऑर्बिट में सूर्य के ज्यादा नजदीक होने के कारण लगभग एक वृत्ताकार आकार में सूर्य का चक्कर लगाता है , शुक्र ग्रह की ऑर्बिटल eccentricity  0.01 से भी कम है |  शुक्र ग्रह सूर्य का एक ऑर्बिट लगभग 224.7 दिनों में पूरा करता है लेकिन वही शुक्र ग्रह पर अगर एक दिन की बात की जाए तो इसका एक दिन लगभग 243 दिनों का होता है | इसका मतलब यह है कि शुक्र ग्रह पर एक दिन इसके एक साल से भी बड़ा होता है |

हमारे सौरमंडल के सभी ग्रह काउंटर क्लॉक वाइज डायरेक्शन में सूर्य का चक्कर लगाते हैं पर शुक्र ग्रह हमारे सौरमंडल का एक ऐसा ग्रह है जो क्लॉक वाइज डायरेक्शन में सूर्य का चक्कर लगाता है |

उपग्रह

शुक्र ग्रह का कोई भी कुदरती उपग्रह नहीं है लेकिन 17 वीं शताब्दी में Giovanni cassini  ने  अपनी रिपोर्ट में यह कहा कि शुक्र ग्रह का एक उपग्रह है जो  इसे ऑर्बिट कर रहा है इस उपग्रह का नाम Neith रखा गया |  लगभग 200 सालों तक इसे देखे जाने की खबरें आती रही लेकिन वह एक तारा था |  कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मैं हमारे सौरमंडल के शुरुआती समय के मॉडल पर किए गए अध्ययन से यह पता लगाया गया कि शुक्र ग्रह के पास भी एक उपग्रह था जो कि किसी  बड़ी टक्कर से बना था , इसके बनने के लगभग 10 मिलियन साल बाद शुक्र ग्रह और किसी आकाशीय पिंड में एक भयानक टक्कर हुई जिससे शुक्र ग्रह की रोटेशन डायरेक्शन भी बदल गई और इसका उपग्रह धीरे-धीरे शुक्र ग्रह की ओर बढ़ने लगा और एक समय ऐसा आया की इसका उपग्रह शुक्र ग्रह से टकरा गया |  भविष्य में अब शुक्र ग्रह के जो भी उपग्रह बनेंगे पूरी संभावना है कि उनका अंत भी ठीक इसी प्रकार होगा |

जीवन

शुक्र ग्रह के वातावरण को देखते हुए हम यह कह सकते हैं कि शुक्र ग्रह पर उस तरह का जीवन नहीं पनप सकता जिन्हें पानी की जरूरत होती है |  शुक्र ग्रह पर इंसानी जीवन पनपना नामुमकिन है क्योंकि शुक्र ग्रह के वातावरण में पानी नहीं है और इसका वातावरण भी बहुत घना है |  शुक्र ग्रह का अपना मैग्नेटोस्फीयर ना होने के कारण यहां सूर्य का खतरनाक रेडिएशन आसानी से किसी भी प्रजाति का अंत कर सकता है | इसके अलावा इसके वातावरण में एसिड रेन और अन्य खतरनाक जहरीले पदार्थ और गैसें पाई जाती है जो कि शुक्र ग्रह पर हमारे जीवन को नामुमकिन बनाती है |  शुक्र ग्रह का तापमान भी एक बड़ा कारण है कि हम शुक्र ग्रह पर जीवन के बारे में सोच भी नहीं सकते , लेकिन हां ऐसा हो सकता है शुक्र ग्रह के ऊपरी वातावरण में , इसकी सतह से  लगभग 50 किलोमीटर ऊपर जहां तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस से 80 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है वहां हम तैरते हुए शहर बना सकते हैं | यह तैरते हुए शहर हमारे लिए जीवन की एक नई उम्मीद है जो कि किसी अन्य ग्रह पर हो सकती है|

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