नेपच्यून ग्रह | Neptune planet facts in hindi

नेपच्यून ग्रह

नेपच्यून ग्रह हमारे सौरमंडल का आठवां ग्रह है और यह है सूर्य से सबसे दूर स्थित ग्रह भी है|  यह  आकार में चौथा सबसे बड़ा ग्रह है और भार  में यह तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है | नेपच्यून को नॉर्मल आंखों से नहीं देखा जा सकता और इसलिए हमारे पूर्वजों द्वारा नेपच्यून खोजा नहीं गया था , पृथ्वी से नेपच्यून की स्टडी करना भी बहुत मुश्किल काम है और इसीलिए नेपच्यून की खोज किसी टेलिस्कोप से नहीं हुई बल्कि नेपच्यून की खोज Mathematical Prediction से की गई |

नेपच्यून ग्रह की खोज

महान वैज्ञानिक गैलीलियो गैलीली ने अपनी टेलिस्कोप से जब अंतरिक्ष की ओर देखना शुरू किया तो उन्होंने ग्रहों और तारों के ड्राइंग बनाई जिन पर पॉइंट बनाकर ग्रहों और तारों को दर्शाया गया था | उन drawings  में 1 point  ठीक उसी जगह पर था जहां आज नेपच्यून है पर गैलीलियो ने इस पॉइंट को एक तारा समझ  लिया था और इसलिए गैलीलियो को नेपच्यून की खोज के लिए क्रेडिट नहीं दिया गया | सन 1821 में Alexis Bouvard में यूरेनस के ऑर्बिट के लिए एक तेरे theoretical table  publish  किया पर जब ऑब्जरवेशन की गई तो ऑर्बिट की Calculation में काफी अंतर आ रहा था तब Alexis Bouvard  ने कहा कि कोई अनजान वस्तु है जो ग्रेविटेशनल इंटरेक्शन के द्वारा यूरेनस के ऑर्बिट को डिस्टर्ब कर रही है |सन 1843 में जॉन John Cauch Adams भी यूरेनस के ऑर्बिट पर रिसर्च कर रहे थे तो उन्होंने भी वहां नया ग्रह होने की कई संभावना जताई | 1845 में Urbain le Verier ने भी अपनी कैलकुलेशन के मुताबिक यूरेनस के बाद एक नया ग्रह होने का दावा किया | नए गृह के इतने ज्यादा Predictions होने के कारण खगोल वैज्ञानिकों  ने इस नए ग्रह को खोजना शुरू कर दिया अंत 23 सितंबर 1846 को हमने  नेपच्यून को खोज लिया नेपच्यून को दो अलग-अलग वैज्ञानिकों ने खोजा जिनके नाम Adams  और Urbain le Verier हैं लेकिन Urbain le Verier को नेपच्यून की खोज का Credit  दिया गया क्योंकि Urbain le Verier ने नेपच्यून की जो Position  बताई थी नेपच्यून ठीक उसके 1 डिग्री के दायरे में था , लेकिन Adams  की बताई गई नेपच्यून की Position  से असल में नेपच्यून 12 डिग्री के दायरे में था Accuracy  के हिसाब से Urbain le Verier ज्यादा सही थे |

नेपच्यून ग्रह का नाम

इस ग्रह का नाम नेपच्यून Urbain le Verier ने  रखा था इसका नाम नेपच्यून रोमन सभ्यता  के अनुसार समुद्र  के देवता के आधार पर Neptune  रखा गया

दूरी और सूर्य की परिक्रमा

नेपच्यून हमारे  सूर्य से लगभग 4.50 बिलियन किलोमीटर दूर है जो कि 30.1 एस्ट्रोनॉमिकल यूनिट (AU) के बराबर है | जब भी यह  सूर्य से सबसे कम दूरी पर होता है तो सूर्य से इसकी दूरी 29.81 एस्ट्रोनॉमिकल यूनिट्स (AU)  होती है लेकिन जब यह सूर्य के सबसे दूर होता है तब इसकी सूर्य से दूरी 30.33 एस्ट्रोनॉमिकल यूनिट्स (AU) होती है नेपच्यून सूर्य का एक चक्कर 164.79 सालों में पूरा करता है, नेपच्यून अपनी धुरी  पर लगभग 28.32 डिग्री तक झुका हुआ है और हमारी पृथ्वी भी लगभग 23 डिग्री तक झुकी हुई है इसीलिए नेपच्यून पर भी हमारी पृथ्वी की ही तरह मौसम बनते हैं , लेकिन नेपच्यून का ऑर्बिटल पीरियड (Orbital Period) ज्यादा लंबा होने के कारण यहां पर एक मौसम ही  लगभग पृथ्वी के 40 वर्षों जितना लंबा होगा | नेपच्यून एक गैसीय ग्रह है जिसके चलते इसके अलग-अलग हिस्से अलग-अलग गति से घूमते हैं इस ग्रह का Equatorial Region का रोटेशनल पीरियड 18 घंटे है जबकि इसका Polar Region का रोटेशनल पीरियड 12 घंटे ही है|

नेपच्यून ग्रह संरचना

नेपच्यून हमारी पृथ्वी से लगभग 17 गुना ज्यादा बढ़ा है इसकी ग्रेविटी 11 m / s2  है जो कि पृथ्वी की ग्रेविटी से 1.14  गुना ज्यादा है इस ग्रह का एक Equatorial Radius  24764 किलोमीटर है , जोकि हमारी पृथ्वी के Radius से 4 गुना ज्यादा है | नेपच्यून ग्रह का इंटरनल स्ट्रक्चर (Internal structure) यूरेनस ग्रह के समान ही है , इसकी अंदरूनी कोर  Iron , Nickel और Silicate  से बनी हुई है और यह पृथ्वी से लगभग 1.2 गुना भारी है इसकी Core का Pressure 7 Mega bar  है जो कि पृथ्वी की कोर से 2 गुना ज्यादा है और इसकी  कोर का तापमान  5400  केल्विन है | नेपच्यून की मेंटल परत  पृथ्वी से लगभग 15 गुना भारी है और इसमें भी यूरेनस की ही तरह  Water-Ammonia अधिक मात्रा में पाए जाते हैं , यह तरल पदार्थ ( Fluid ) हाइली इलेक्ट्रिकल कंडक्टिव (Highly Electric Conductive ) हैं  जिसे हम वाटर अमोनिया ओसियन भी कहते हैं | दूसरे Giant planets  की तरह नेपच्यून भी Internal Heat Generate  करता है जो कि सूर्य से मिलने वाली उर्जा से लगभग 2.1 गुना ज्यादा उर्जा अन्तरिक्ष में छोड़ देता है |

नेपच्यून ग्रह का वातावरण

नेपच्यून के बाहरी वातावरण  में 80% हाइड्रोजन  और 19% हेलियम पाए जाते हैं, मीथेन और अन्य Elements  के Traces  भी इसके वातावरण  में देखने को मिले हैं |  नेपच्यून ग्रह को Ice Giant  भी कहा जाता है क्योंकि यह ग्रह बहुत ही ठंडा है और यहां का औसत तापमान  -214 डिग्री सेल्सियस तक रहता है | सन 2007 में नेपच्यून के दक्षिणी ध्रुव को इस ग्रह की सबसे गर्म जगह माना गया जहां  का तापमान लगभग-200 डिग्री सेल्सियस था यह ध्रुव गर्म  इसलिए था क्योंकि पिछले 40 सालों से नेपच्यून का यह दक्षिणी ध्रुव  सूर्य की तरफ था | नेपच्यून ग्रह पर बहुत तेज हवाएं चलती हैं यहां पर सबसे तेज चलने वाली हवाओं की गति 600 m/s  से भी ज्यादा है जो कि  Super sonic Flow  के लगभग बराबर है , नेपच्यून पर चलने वाली ज्यादातर हवाओं की दिशा  इसके  घूमने की दिशा  के पूरी तरह से  विपरीत  है |

नेपच्यून ग्रह पर तूफ़ान

सन  1989 में वॉयजर 2 अपने नेपच्यून Flyby  के दौरान इस ग्रह पर एक बड़ा तूफान खोजा जिसे ग्रेट डार्क स्पॉट ( Great Dark Spot ) के नाम से जाना जाता है , क्योंकि यह देखने में गहरे रंग का था | ग्रेट डार्क स्पॉट की तुलना ब्रहस्पति ग्रह  के द ग्रेट रेड स्पॉट (The Great Red Spot ) तूफ़ान से की जाती है पर यह तूफान जल्दी ही गायब हो गया जिसकी पुष्टि 2 नवंबर सन 1994 में हबल स्पेस टेलिस्कोप ने की थी |  नेपच्यून पर ग्रेट डार्क स्पॉट के अलावा वाइट स्पॉट्स भी पाए जाते हैं जो इसके वातावरण  के ऊपरी हिस्से में आने वाले तूफानों में से एक हैं,  उन तूफानों को स्कूटर भी कहा जाता है |

नेपच्यून ग्रह उपग्रह

नेपच्यून ग्रह के 14 उपग्रह अब तक खोजे जा चुके हैं | नेपच्यून ग्रह का सबसे बड़ा उपग्रह Triton  है जो कि नेपच्यून की खोज के 17 दिन बाद ही खोज लिया गया था  , Triton  एक ठंडा उपग्रह है जहां का औसत तापमान लगभग -235 डिग्री सेल्सियस है यह माना जाता है कि Triton  नेपच्यून का कुदरती उपग्रह नहीं है , शायद यह कोई बौना ग्रह रहा होगा लेकिन नेपच्यून ने अपने गुरुत्वाकर्षण  से इसे खींच लिया होगा |नेपच्यून के ऑर्बिट में 99.5% भार Triton का ही है  | यह  उपग्रह आकार में लगभग गोल है जबकि नेपच्यून के बाकी उपग्रह अनिमियत आकार  के हैं |

नेपच्यून ग्रह के छल्ले

नेपच्यून ग्रह की रिंग ( छल्ले ) भी हैं इस ग्रह की तीन रिंग्स Adams , le varier  और Galle  है लेकिन यह रिंग्स बहुत ज्यादा हल्की हैं एक समय तो  यह मान लिया गया था कि नेपच्यून की रिंग्स अधूरी है क्योंकि यह रिंग्स आसानी से दिखाई नहीं देती हैं

मिशन

अगस्त 1989 में वॉयजर 2  नेपच्यून के सबसे नजदीक था और उस समय वॉयजर 2 ने नेपच्यून को स्टडी किया | वॉयजर 2 ने नेपच्यून पर आने वाले तूफान इसके वातावरण ,  तापमान और इसकी संरचना  के बारे में बताया वॉयजर 2 से ही हमें नेपच्यून पर एक्टिव मौसम चक्र ( Wether System ) होने का पता चला | नेपच्यून के 6 उपग्रहों को वॉयजर 2 खोजा था और यह भी स्पष्ट किया कि नेपच्यून के पास एक से ज्यादा रिंग्स है और अनेकों सटीक जानकारियां वॉयजर 2 नेपच्यून के बारे में हमें भेजीं |

रहस्य

नेपच्यून से जुड़ी अनेकों बातें अभी ऐसी हैं जो पूरी तरह से हमारे लिए एक रहस्य बनी हुई है नेपच्यून ग्रह पर डार्क स्पॉट नाम का तूफान जल्दी गायब कैसे हो जाता है और इसके पीछे क्या Mechanism है यह अभी हमारे लिए भी सवाल है | नेपच्यून सूर्य से बहुत ज्यादा दूर है लेकिन फिर भी नेपच्यून पर हवाएं 600 m/s की रफ्तार से चलती हैं और जबकि इसका इंटरनल हीट सोर्स ( Internal Heat Source ) भी काफी कमजोर है तो फिर नेपच्यून पर ऐसा क्या है जो यहां पर हवाओं को इतनी ज्यादा गति देता है | नेपच्यून का Magnetic Field झुका हुआ है और इसका Magnetic Field ऑफ सेंटर ( Off Centre ) भी है ऐसा क्यों  यह रहस्य भी अभी तक सुलझा नहीं है |

जीवन

नेपच्यून एक गैसीय ग्रह है जहां पर जीवन होने की कोई कल्पना नहीं की जा सकती  |