बृहस्पति ग्रह

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बृहस्पति ग्रह हमारे सौरमंडल का पांचवा ग्रह है | यह हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है और इसका भार हमारे सौरमंडल के सभी ग्रहों के कुल भार का ढाई गुना है | बृहस्पति ग्रह एक गैसीय ग्रह हैऔर यह हमारे आसमान से दिखाई देने वाली चौथी सबसे चमकीली वस्तु है|

संरचना

बृहस्पति ग्रह मुख्य रूप से गैस और तरल पदार्थ का बना हुआ है |बृहस्पति ग्रह लगभग 90% हाइड्रोजन और 10% हेलियम और अन्य गैसों से बना हुआ है  बृहस्पति ग्रह के बारे में  लगभग 75% भार  हाइड्रोजन गैस का है 24% भार  हीलियम का और 1% भार अन्य गैसों का है |

बृहस्पति ग्रह की अंदरूनी कोर भारी और  ज्यादा घनत्व वाले तत्वों की बनी हुई है कोर के बाहरी परतें तरल मेटालिक हाइड्रोजन और हीलियम की बनी हुई है और इस की ऊपरी परतें मॉलिक्यूलर हाइड्रोजन की है | माना जाता है कि बृहस्पति ग्रह की कोर चट्टानी है लेकिन इसके बारे में हमारे पास विस्तृत जानकारी मौजूद नहीं है |  सन 1997 में बृहस्पति ग्रह के ग्रेविटेशनल मेज़रमेंट से यह अंदाजा लगाया गया कि बृहस्पति ग्रह की कोर का भार  हमारी पृथ्वी के भार से लगभग 12 से 45 गुना ज्यादा होगा और या फिर यूं कहें तो इस की कोर का भार बृहस्पति ग्रह के कुल भार  का 10% से 14% होगा | कुछ मॉडल्स जो यह बताते हैं कि बृहस्पति ग्रह आखिर कैसे बना और मॉडल से हमें यह पता चलता है कि बृहस्पति ग्रह के केंद्र में कोर चट्टानी हो सकती है और इसकी संभावना ज्यादा है |

बृहस्पति ग्रह के भूमध्य भाग में इसका डायमीटर 142984 किलोमीटर है | बृहस्पति ग्रह का घनत्व 1.326 ग्राम पर सेंटीमीटर क्यूब है जोकि सभी Gas giant planets में सबसे ज्यादा है |

Jupiter planet
वातावरण

हमारे सौरमंडल में बृहस्पति ग्रह का वातावरण सबसे बड़ा है यहां का वातावरण लगभग 5000 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है इसका सबसे बड़ा कारण यह भी है कि बृहस्पति ग्रह पर कोई सतह नहीं है क्योंकि यह गैस का बना हुआ है |  बृहस्पति ग्रह के वातावरण में मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम ही पाई जाती है लेकिन इसके अलावा अन्य  गैस है और पदार्थ भी पाए जाते हैं | इसके वातावरण में मीथेन वाटरवेपर , अमोनिया , सिलिकॉन कंपाउंड्स , कार्बन , हाइड्रोजन-सल्फाइड , ऑक्सीजन और फास्फोरस  आदि के ट्रेसेस भी मिले हैं|

बृहस्पति ग्रह का वातावरण बादलों से घिरा हुआ है जोकि अमोनिया क्रिस्टल और अमोनियम हाइड्रो सल्फाइड से बने हो सकते हैं और बृहस्पति ग्रह के यह बादल इसके वातावरण की ऊंचाई के अनुसार बने हुए हैं |इन बादलों के अलावा यहां पानी के बादल भी हो सकते हैं ऐसा इसलिए मना गया क्योंकि बृहस्पति ग्रह के वातावरण में बिजली चमकती हुई देखी गई और यह बिजली हमारी पृथ्वी पर चमकने वाली बिजली सही हजारों गुना ज्यादा ताकतवर थी |

बृहस्पति ग्रह पर बादलों के अलग-अलग बैंड बने हुए हैं और  इन बैंड में अनेकों तरह के रंगों के बादल पाए जाते हैं यह रंग इसके बादलों में पाए जाने वाले तत्वों के कारण होता है जो कि अल्ट्रावायलेट लाइट पड़ने  पर ऐसे दिखाई देते हैं|

तूफान

Great Red Spot compared with Earth
यहां के वातावरण में हवाएं आमतौर पर 360 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है | लेकिन बृहस्पति ग्रह पर हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा और ताकतवर तूफान भी पाया जाता है जिसे हम जानते हैं द ग्रेट रेड स्पॉट के नाम से |  माना जाता है कि यह तूफान बृहस्पति ग्रह पर सन 1831 से बना हुआ है और यह भी संभव है कि यह तूफान इससे भी पहले सन 1665 मैं बना हो  यह तूफान कैसे बना फिलहाल निश्चित तौर पर हमारे पास इस प्रश्न का उत्तर नहीं है |  यह तूफान इतना ज्यादा बडा  है कि पृथ्वी से किसी टेलिस्कोप से देखने पर इसे आसानी से देखा जा सकता है |

बृहस्पति ग्रह के इस तूफान के बारे में एक बात दिलचस्प है जो हम यह जानेंगे| सन 1979 में वॉयजर फ्लाई बाई  ने बृहस्पति ग्रह के इस तूफान का अध्ययन किया और यह बताया कि इस तूफान की लंबाई 23300 किलोमीटर है और चौड़ाई 13000 किलोमीटर लेकिन इसके बाद हबल स्पेस टेलीस्कोप से 1995 में इस तूफान का अध्ययन किया गया लेकिन तब इसका आकार  20950 किलोमीटर ही रह गया था 2009 में अध्ययन करने पर इसका आकार घटकर 70910 किलोमीटर रह गया और 2015 के आंकड़ों के अनुसार इसका आकार घटकर 16500 किलोमीटर ही रह गया इन सभी अध्ययनों से हमें यह पता चला कि इस तूफान का आकार लगातार घटता जा रहा है और यह अंदाजा लगाया गया कि इसका आकार 930 किलोमीटर प्रति वर्ष की गति से घट रहा है  ऐसा लगता है कि आने वाले समय में हम बृहस्पति ग्रह के इस बड़े तूफान को नहीं देख पाएंगे  और यह सिर्फ कहानियों और किस्सों में ही रह जाएगा|

मैग्नेटो स्फीयर

बृहस्पति ग्रह का मैग्नेटो स्फीयर उसकी  हमारी पृथ्वी के मैग्नेट फिर से लगभग 14 गुना  ज्यादा ताकतवर है और इसके साथ ही इसका मैग्नेटो शेर हमारे सौरमंडल का सबसे ताकतवर और बड़ा नग्न तस्वीर है | इसकी  कोर में मौजूद तरल मेटालिक हाइड्रोजन की गति से एडी करंट बनता है जिससे बृहस्पति ग्रह का विशाल मैग्नेटो स्फीयर जन्म लेता है |

ऑर्बिट और रोटेशन

बृहस्पति ग्रह सूर्य से लगभग 778 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जो कि हमारी और सूर्य की दूरी से 5.2 गुना ज्यादा है (5.2 AU) | एक चक्कर पूरा करने में बृहस्पति ग्रह को लगभग 11.86 सालों का समय लगता है |  बृहस्पति ग्रह अपनी धुरी पर लगभग  3.13 डिग्री झुका हुआ है जो कि हमारी पृथ्वी के झुकाव से बहुत कम है और इसीलिए बृहस्पति ग्रह पर हमारी पृथ्वी और मंगल ग्रह की तरह  मौसम नहीं बनते हैं | बृहस्पति ग्रह अपने अक्ष पर 10 घंटों से भी कम समय में एक चक्कर पूरा कर लेता है और इस प्रकार बृहस्पति ग्रह का रोटेशनल पीरियड हमारे सौरमंडल में सबसे तेज है लेकिन इस ग्रह के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग गति से घूमते हैं जैसे कि बृहस्पति ग्रह का ध्रुवीय इलाका इसके मध्य इलाके से 5 मिनट की देरी से एक चक्कर पूरा करता है |

उपग्रह

बृहस्पति ग्रह के 69 कुदरती उपग्रह है जो अभी तक हमारे द्वारा खोजे गए हैं लेकिन इसके  बाहरी अंतरिक्ष में अनेकों पिंड ऐसे घूम रहे हैं जो आकार में 10 किलोमीटर से भी छोटे हैं लेकिन उन्हें अभी तक बृहस्पति ग्रह के उपग्रह होने का दर्जा नहीं मिला है | बृहस्पति ग्रह के उपग्रहों में गैलीलियो गैलीली द्वारा खोजे गए चार उपग्रह मुख्य है जो कि इसकी सबसे बड़ी उपग्रहों में शामिल है यह उपग्रह टेलीस्कोप द्वारा खोजी गई थे |  ग्रहों के नाम है आईओ यूरोपा गेनीमेड और कैलिस्टो |