बुध ग्रह

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बुध ग्रह 
बुध ग्रह हमारे सौरमंडल का पहला ग्रह है और साथ ही यह हमारे सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह भी है | शाम के समय  यह ग्रह आसमान में किसी तारे की तरह चमकता है ,  लेकिन शुक्र ग्रह के मुकाबले थोड़ा कम चमकता है | शुक्र ग्रह के साथ-साथ बुध ग्रह को भी सुबह और शाम का तारा कहा जाता है

बुध ग्रह की खोज
बुध ग्रह को हमारे पूर्वज सदियों से जानते थे ,अलग-अलग महाद्वीपों और अलग-अलग देशों में रहने वाले प्राचीन लोग इसे अलग-अलग नामों के जरिए जानते थे | आधुनिक युग में बुध ग्रह को सबसे पहले 17 वी शताब्दी में गैलीलियो गैलीली ने अपनी टेलिस्कोप से देखा | सन 1631 में Pierre Gassendi ने पहली बार अपनी टेलिस्कोप से इस ग्रह  के ट्रांजिट ( Transit ) को देखा | 28 मई 1737 को जॉन बेविस ( John Bavis) ने रॉयल ग्रीनविच  ऑब्जर्वेटरी से इतिहास का सबसे पहला प्रच्छादन ( Occulation ) देखा जो कि  बुद्ध और शुक्र ग्रह का था

बुध ग्रह की संरचना
यह ग्रह हमारे सौर मंडल के चार चट्टानी ग्रहों में से एक है  | यह ग्रह पथरीला है बिल्कुल हमारी पृथ्वी की तरह है | इसका अर्धव्यास  ( Radius ) 2400 39.7 किलोमीटर है जो कि हमारे सौरमंडल के कुछ उपग्रहों से भी छोटा है | माना जाता है कि यह ग्रह 70% लौह तत्व और 30% सिलीकेट मटेरियल ( Silicate Material )  से बना हुआ है  | इस ग्रह का घनत्व हमारे सौरमंडल में पृथ्वी के बाद दूसरे नंबर पर है  , पृथ्वी  का घनत्व सबसे ज्यादा है जो कि 5.5 15 g/cm3 है जबकि बुध ग्रह का घनत्व 5.27 g/cm3 है | भू वैज्ञानिक मानते हैं कि बुध ग्रह के  कुल आयतन  ( Volume ) के 55% भाग में बुध ग्रह की कोर है जबकि पृथ्वी की कोर पृथ्वी के कुल वॉल्यूम का सिर्फ 17% ही है | इसकी कोर को लगभग 500 से 700 किलो मीटर चौड़ी मेंटल ( Mantle) ने घेर रखा है इसकी मेंटल सिलिकेट से बनी हुई है और मेंटल के ऊपर 35 किलोमीटर मोटी क्रस्ट ( Crust ) है |

बुध ग्रह की सतह
बुध ग्रह की सतह पूरी तरह से हमारे चांद की तरह दिखाई देती है |  इसकी सतह पर बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं जो यह दर्शाते हैं कि बुध ग्रह अरबों सालों से भोगोलिक रूप से निष्क्रिय ( Geologicaly Inactive ) है |  इसकी सतह पर क्षुद्रग्रहों और अन्य आकाशीय पिंडों के टकराने से बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं  , माना जाता है कि जब यह ग्रह बन रहा था तभी यह घटनाएं घटी  होंगी | इस ग्रह की सतह पर छोटे से लेकर कई सौ किलो मीटर चौड़े इंपैक्ट क्रेटर ( Impact Crater) बने हुए हैं  | बुध पर सबसे बड़ा इंपैक्ट क्रेटर ( Impact Crater ) यानी खड्डा Coloris Basin  है ,  जिसका व्यास ( Diameter ) 1550 किलोमीटर है | माना जाता है कि जिस भयानक टक्कर से यह इंपैक्ट क्रेटर  बना था , वह इतना ताकतवर था कि उस टक्कर से लावा निकलने लगा था और उस लावा  से क्रेटर के चारों ओर 2 किलो मीटर ऊंची एक रिंग बन गई |

बुध ग्रह पर वातावरण
जब यह ग्रह सूर्य के सबसे पास होता है तब इस ग्रह का जो हिस्सा सूर्य की तरफ होता है वहां का तापमान 700 केल्विन तक चला जाता है ,  वही जब यह सूर्य से सबसे दूर होता है तो इसका तापमान 550 केल्विन तक रहता है | इस ग्रह का वह हिस्सा जहां सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचती वहां का तापमान गिरकर 110 केल्विन तक चला जाता है , जो कि अधिकतम तापमान से काफी कम है | बुध ग्रह के गहरे क्रेटर  में जहां सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचती वह इलाके भी ठंडे ही रहते हैं वहां का तापमान 102 केल्विन तक ही रहता है | बुध ग्रह आकार और भार में बहुत छोटा है और इसका  गुरुत्वाकर्षण बल भी बहुत कम है इसलिए यह वातावरण को रोककर नहीं रख पाता , फिर भी  इस ग्रह पर बहुत हल्का वातावरण है जिसमें हाइड्रोजन , हीलियम , ऑक्सीजन , सोडियम , कैल्शियम , पोटेशियम और अन्य एलिमेंटस  पाए जाते हैं | बुध ग्रह पर वायुमंडलीय दबाव 0.5 एनपीए से भी कम है | बुध ग्रह का अपना बहुत ही छोटा मैग्नेटिक फील्ड है | यह जानकारी हमें  मैरीनर 10  स्पेसक्राफ्ट ने दी | इस ग्रह का  मैग्नेटिक फील्ड ज्यादा ताकतवर नहीं है यह पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड का सिर्फ 1.1% ही है | 6 अक्टूबर 2018 को मैसेंजर स्पेसक्राफ्ट में इस ग्रह के दूसरे फ्लाई बाई ( Flyby )के दौरान यह जानकारी दी कि बुध ग्रह के मैग्नेटिक फील्ड में बड़े-बड़े  छेद हैं जहां से  सोलर विंड्स (Solar Winds ) और खतरनाक रेडिएशन सीधे ही बुध ग्रह की सतह तक पहुंच सकता है |

ऑर्बिट और रोटेशन
बुध ग्रह सूर्य से 4 करोड़ 60 लाख  किलोमीटर से लेकर 7 करोड़ किलोमीटर की दूरी से  सूर्य के चक्कर लगा रहा है | यह ग्रह सूर्य का एक चक्कर 87.97 दिनों में पूरा करता है , जो कि बुध ग्रह के आधे दिन के बराबर है | बुध ग्रह अपनी धुरी पर बहुत धीमी गति से घूमता है और इसीलिए बुध ग्रह के 2 सालों में एक ही दिन होता है |

बुध ग्रह के चंद्रमा
बुध ग्रह का अपना कोई भी कुदरती उपग्रह नहीं है |

बुध ग्रह पर जीवन
यह ग्रह हमारे सौरमंडल का दूसरा सबसे गर्म ग्रह है | इस ग्रह पर भेजे गए अंतरिक्ष यान भी इसकी भयानक गर्मी से पिघल गए थे , ऐसे में यहां  मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती | गर्मी के अलावा यहां रहने लायक वातावरण भी नहीं है , खतरनाक रेडिएशन से मनुष्य यहां नहीं बच सकता  अंत यहां जीवन मुमकिन नहीं है |

मिशन
बुध ग्रह पर पहला मिशन नासा ने 1974 से 1975 में मेरिनर 10  भेजा | मेरिनर 10  ने ही हमें बुध ग्रह की सतह की तस्वीरें भेजी और हमें पता चला कि बुध ग्रह की सतह क्रेटर से भरी पड़ी है | मेरिनेर 10 बुध ग्रह के सिर्फ 45% हिस्से को ही मैप कर पाया | इस स्पेसक्राफ्ट की  बुध ग्रह की सतह से सबसे कम दूरी 327 किलोमीटर थी , इतनी कम दूरी से स्पेसक्राफ्ट ने बुध ग्रह के मैग्नेटिक  फील्ड को डिटेक्ट किया , जिसने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया था क्योंकि बुध ग्रह इतनी तेजी से अपनी धुरी पर नहीं घूमता है कि यह अपना मैग्नेटिक फील्ड बना पाए | 24 मार्च 1975 को यह स्पेसक्राफ्ट अंतिम बार इस ग्रह के बिल्कुल पास गया था लेकिन 8 दिन बाद ही इसका इंजन खत्म होने के कारण यह मिशन बंद करना पड़ा | बुध ग्रह के लिए दूसरा मिशन मैसेंजर भेजा गया जिसे 3 अगस्त 2004 को लांच किया गया इसने  बुध ग्रह का पहला फ्लाईबाई ( Flyby )  14 जनवरी 2008 , दूसरा फ्लाईबाई ( Flyby )  6 अक्टूबर 2008 और तीसरा फ्लाईबाई ( Flyby )  29 सितंबर 2009 को किया | मैसेंजर ने  बुध ग्रह के उन हिस्सों को भी मैप  किया जिसे मेरिनर 10  नहीं कर पाया था | इसने अनेकों प्रश्नों के जवाब दिए जिनमें से मुख्य थे

1 . बुध ग्रह की डेंसिटी इतनी ज्यादा क्यों है |

2 . इसका वातावरण कैसे बना |

3 . इसका मैग्नेटिक फील्ड कैसे बना होगा आदि |

30 अप्रैल 2015 को मैसेंजर स्पेसक्राफ्ट भी बुध ग्रह से टकरा गया |

यूरोपियन स्पेस एजेंसी जापान के साथ मिलकर बुध ग्रह पर एक मिशन भेजने की तैयारी कर रही है जिसका नाम है  Bepicolombo  जिसमें दो प्रोब भेजे जायेंगे जो बुध ग्रह को ऑर्बिट करेंगे | इसे  2018  में लॉन्च करने की संभावना है और यह 2025 तक बुध ग्रह तक पहुंच जाएगा यह मिशन बुध ग्रह के रहस्यों को उजागर करेगा जो आज तक हमारे लिए चुनौती बने हुए हैं |

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