शनि ग्रह

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शनि ग्रह  हमारे सौरमंडल का छठा ग्रह है यह ग्रह बृहस्पति ग्रह के बाद दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है  यह हमारे सौरमंडल का छल्लो वाला सबसे खूबसूरत ग्रह भी है शनि ग्रह हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति से काफी मिलता-जुलता है |

इतिहास  और खोज
शनि ग्रह हमारे सौर मंडल के उन पांच ग्रहों में शामिल है यह हैं साधारण आंखों से देखा जा सकता है और यही वजह थी  कि हम शनि ग्रह को प्राचीन काल से ही जानते हैं  | सन 1610 में गैलीलियो गैलीली ने पहली बार शनि ग्रह को टेलिस्कोप से देखा था , गैलीलियो गैलीली ने ही  शनि ग्रह की रिंग को पहली बार देखा |  गैलीलियो गैलीली के बाद शनि ग्रह के सबसे बड़े चंद्रमा टाइटन को हाईजन (Hygens )और कैसिनी ( Casini ) ने   इसके चार और चंद्रमा खोजें  | सन 1789 में विलियम हर्शेल ने शनि ग्रह के दो और चंद्रमा खोजें और इसके बाद आधुनिक विज्ञान की मदद से हमने शनि ग्रह के अनेकों  राज जानने की कोशिश की |

संरचना
शनि ग्रह मुख्य रूप से  हाइड्रोजन और हीलियम का बना हुआ है | शनि ग्रह एक गैसीय ग्रह है , इस ग्रह की कोई  सतह नहीं है पर ऐसा माना जाता है की शनि ग्रह की भी बृहस्पति ग्रह की तरह पथरीली कोर है | शनि ग्रह की गहराइयों में हाइड्रोजन और हीलियम तरल रूप में मौजूद हो सकती है और ऐसा माना जाता है कि शनि ग्रह का भार गैसीय हाइड्रोजन और हीलियम में ना होकर  उस तरल हाइड्रोजन और हीलियम का है जो इसके गहराइयों में स्थित है | शनि ग्रह की कोर लौह तत्व और निकल ( Nickel ) की बनी हो सकती है और इसके चारों ओर हाइड्रोजन और हीलियम और इनके अलावा अन्य ज्वलनशील  पदार्थों के  ट्रेसेस  ( Traces ) भी हो सकते हैं | सन 2004 में वैज्ञानिकों ने यह  अनुमान लगाया कि शनि ग्रह की कोर पृथ्वी के कुल  भार से लगभग 22 गुना ज्यादा भारी है  और इसके मुताबिक शनि ग्रह की कोर का डायमीटर 25 हज़ार  किलोमीटर तक होने का अनुमान लगाया गया शनि ग्रह का अंदरूनी   हिस्सा बहुत ही ज्यादा गर्म है  | इस की कोर का तापमान लगभग 11700 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और शनि ग्रह सूर्य से मिलने वाली एनर्जी  से ढाई गुना ज्यादा एनर्जी अंतरिक्ष में रेडियेट ( Radiate ) कर देता है बृहस्पति ग्रह में अंदरूनी ऊर्जा ( Internal Energy ) इसके गुरुत्व  दबाव से पैदा होती है लेकिन इस Concept  से शनि ग्रह की अंदरूनी उर्जा को समझाया  नहीं किया जा सकता क्योंकि शनि ग्रह इतना ज्यादा बड़ा नहीं है कि वह इतनी ज्यादा ऊर्जा पैदा कर सकें | इसे Explain  करने के लिए एक कल्पना यह की गई कि शनि ग्रह के वातावरण में हीलियम की बारिश होती है जो नीचे जाते हुए हाइड्रोजन के कणों से टकराती है और इस टकराव से ऊर्जा पैदा होती है और कुछ ऊर्जा घर्षण ( Friction ) से पैदा होती है और इस तरह शनि ग्रह की आंतरिक ऊर्जा को एक्सप्लेन किया जाता है |

वातावरण
शनि ग्रह के वातावरण में लगभग 96 % हाइड्रोजन है और 3.2 5% हीलियम है | इस ग्रह पर हीलियम से भारी एलिमेंट्स( Elements ) की मात्रा का अभी पक्के तौर पर पता नहीं है पर अनुमान लगाया जाता है कि इसका भार पृथ्वी के बाहर से लगभग 30 गुना तक ज्यादा हो सकता है जो कि इसकी कोर में पाए जाते होंगे | शनि ग्रह के वातावरण में अमोनिया , इथेन , ऐसीटिलीन और मीथेन आदि के ट्रेसेस ( Traces ) भी मिले हैं | बृहस्पति ग्रह की ही तरह शनि पर भी बादलों की परतें हैं , बादलों की सबसे ऊपरी परत अमोनिया क्रिस्टल की है और नीचे की परतें अमोनियम हाइड्रोजन सल्फाइड  की है और यहां पानी के बादल भी पाए जा सकते हैं | शनि ग्रह पर भी बैंड पैटर्न ( Pattern ) पाया जाता है पर बृहस्पति ग्रह के मुकाबले यह बैंड काफी हल्के रंग के हैं और ज्यादा चौड़े हैं | शनि ग्रह के ऊपरी बादलों की परतों का तापमान 107 केल्विन  और दबाव ( Pressure ) 2 bar  रहता  है | इन बादलों में सिर्फ अमोनिया आईस ही पाई जाती है , जैसे जैसे हम शनि ग्रह के वातावरण में अंदर जाते जाएंगे इसका दबाव बढ़ता ही जाएगा | इसके वातावरण में 9.5 bar  के दवाब तक पहुंचते-पहुंचते Water ice  के बादल शुरू हो जाते हैं और इस जगह का तापमान लगभग 270 केल्विन तक पहुंच जाता है और अंत में सबसे नीचे के बादलों में पानी और अमोनिया का सलूशन ( solution ) पाया जाता है | इस इलाके में दवा 20 बार तक चला जाता है और यहां का तापमान 330 केल्विन तक रहता है शनि ग्रह हमारे सौरमंडल का सबसे कम घनत्व वाला ग्रह है इसका घनत्व 0.68 7 g/cm3  है जो कि साधारण पानी  के घनत्व से भी कम है | शनि ग्रह का नार्मल तापमान -185 डिग्री सेल्सियस रहता है  लेकिन शनि ग्रह के दक्षिणी  ध्रुवीय इलाकों पर गर्म vortex  के कारण यहां तापमान -122 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है जो कि शनि ग्रह की सबसे गर्म जगह मानी गई है |

तूफान
शनि ग्रह पर  हमारे सौरमंडल की दूसरे नंबर पर सबसे तेज हवाएं चलती हैं जो कि 500 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चलती हैं | सन 1990 में हबल स्पेस टेलीस्कोप ने एक बड़ा सफेद बादल शनि ग्रह पर देखा जिसे The Great White Spot  | यह बादल शनि ग्रह पर एक बड़ा तूफान था लेकिन यह सफेद तूफान  वॉयजर प्रोब  द्वारा नहीं देखा गया , यह एक अजीब बात थी बाद में अध्ययनों में यह पता चला कि ग्रेट वाइट स्पॉट ( The Great White Spot ) एक जल्दी खत्म हो जाने वाला तूफान है जो शनि ग्रह पर हर 30 साल में एक बार बनता है  , शनि ग्रह पर अगला तूफान सन 2020 में आएगा | शनि ग्रह के उत्तरी ध्रुव पर एक हेक्सागोनल क्लाउड पैटर्न ( Hexagonal Cloud Pattern ) बना हुआ है जो इस ग्रह के साथ ही घूमता है पर यह पैटर्न कैसे बना यह आज भी एक रहस्य है | दक्षिणी ध्रुव पर ऐसा कोई भी Vortex या Cloud Pattern  नहीं  है पर एक बहुत बड़ा साफ़  दिखाई देता तूफान है जो कि EyeBall की तरह है इससे पहले सिर्फ पृथ्वी पर ही इस तरह के तूफान देखे गए थे शनि पर यह तूफान और  अरबों सालों से है |

शनि ग्रह के छल्ले
शनि ग्रह  अपने छल्लों के लिए भी जाना जाता है जो इसे एक अनोखा ग्रह बनाते हैं | शनि ग्रह के  छल्लो को हम किसी छोटे टेलिस्कोप से भी देख सकते हैं यह छल्ले इस  ग्रह के केंद्र से 1 लाख 20 हजार 700 किलोमीटर की दूरी तक फैले हुए हैं  ,और इन छल्लो की चौड़ाई लगभग 1 किलोमीटर से भी कम है | शनि ग्रह के छल्ले 93 प्रतिशत पानी और लगभग 7% कार्बन से बने हुए हैं |  अगर हम शनि ग्रह के छल्लो के सारे मेटेरियल को इकट्ठा करके एक ग्रह का निर्माण करें तो उस ग्रह  का व्यास 200 किलोमीटर से ज्यादा नहीं होगा | शनि ग्रह के छल्लों से एक बहुत ही रहस्यमई चीज जुड़ी हुई है , सन 1980 में वोयजर स्पेसक्राफ्ट ने इसके  छल्लों  में एक बेहद ही  रहस्यमई आकृतियां देखो जिन्हें spokes  कहा जाता है | माना जाता है कि यह स्पोक्स शनि ग्रह के छल्लों के ऊपर और नीचे के पदार्थों  और शनि ग्रह के मैग्नेटिक फील्ड से हुई इंटरेक्शन के कारण बनते हैं |  इन स्पोक्स की सबसे अजीब बात यह है कि ये स्पोक्स  सिर्फ शनि ग्रह के गर्मियों और सर्दियों के मौसम में ही दिखाई देती है|

उपग्रह
शनि ग्रह के 62 मुख्य उपग्रहों को हम अभी तक खोज चुके हैं और इनको नाम भी दिए जा चुके हैं शनि ग्रह के इर्द-गिर्द हजारों की संख्या में ऐसे छोटे-छोटे Moonlets  भी  घूम रहे हैं जिन का व्यास 500 मीटर से भी कम है और यह मूनलेट्स ( Moonlets ) शनि ग्रह  के  छल्लो में घूम रहे हैं लेकिन इन मूनलेट्स को शनि ग्रह का वास्तविक उपग्रह नहीं माना जाता | टाइटन शनि ग्रह का सबसे बड़ा उपग्रह है | शनि ग्रह के इर्द-गिर्द घूमने वाली सभी वस्तुओं में 90% भार सिर्फ टाइटन का ही है | हमारे सौरमंडल में टाइटन एक ऐसा उपग्रह है जहां जीवन की संभावनाएं हो सकती हैं , यहां पर पृथ्वी की तरह वातावरण भी पाया जाता है | शनि ग्रह का दूसरा सबसे बड़ा उपग्रह रिया ( Rhea ) है , रिया उपग्रह  के पास भी बिल्कुल शनि ग्रह की तरह अपने छल्ले हैं  जोकि इसे एक अनोखा उपग्रह बनाते हैं |

मिशन
शनि ग्रह के अध्ययन के लिए सितंबर सन 1979 मैं पायनियर 11 ( Pioneer 11 ) भेजा गया जिसने इस ग्रह और इसके उपग्रहों का भी अध्ययन किया | पायनियर 11 ने हमें शनि ग्रह की तस्वीरें भी भेजीं लेकिन उन तस्वीरों की Resolution बहुत कम थी | इस मिशन के दौरान पायनियर 11 ने  शनि ग्रह के सबसे बड़े उपग्रह टाइटन का तापमान भी रिकॉर्ड किया | सन 1980 में वॉयजर 1 भेजा गया जिसने शनि ग्रह की ऐसी तस्वीरें भेजी जिनका Resolution  बहुत ज्यादा था जिनसे हमें शनि ग्रह के बारे में और अधिक और सटीक जानकारी मिली , शनि ग्रह की विस्तारपूर्वक जानकारी हमें वॉयजर 1 ने भेजी | सन 1981 में वॉयजर 2 भी  इस ग्रह के नजदीक होकर गुजरा था और इस दौरान वॉयजर 2 ने भी इस ग्रह का गहराई से अध्ययन किया |अपने इस अध्ययन के दौरान वॉयजर 2 ने इसका वातावरण , इसके छल्ले सतह और इसके उपग्रहों का अध्ययन किया | वॉयजर 2 ने  शनि ग्रह के मुख्य उपग्रहों  के वातावरण का भी अध्ययन किया था  | शनि ग्रह के लिए आखरी मिशन कैसिनी हाईजन स्पेसक्राफ्ट ( Casini Hygens Spacecraft ) भेजा गया जो कि 2004 में शनि ग्रह के ऑर्बिट में दाखिल हुआ इस स्पेसक्राफ्ट ने भी शनि ग्रह की हाई रिजोल्यूशन इमेजेस  हमें भेजीं |  इस  स्पेसक्राफ्ट ने शनि ग्रह के सबसे बड़े उपग्रह टाइटन बहुत ही दुर्लभ तस्वीरें भेजीं  इसने टाइटन  पर बहती झीलों नदियों और इसकी सतह को भी  दिखाया |

रहस्य
हालांकि हम शनि ग्रह के बारे में काफी कुछ जान चुके हैं लेकिन आज भी कुछ रहस्य ऐसे हैं जिनके बारे में हम अभी तक अनजान हैं  जैसे कि

1 . शनि ग्रह के छल्ले आखिर अस्तित्व में कैसे आए |

2 . शनि ग्रह अपनी आंतरिक उर्जा कैसे बनाता है यह भी हमारे लिए एक बड़ी पहेली है |

3 . शनि ग्रह के छल्ले में दिखाई देने वाले रहस्यमई  Spokes आखिर कैसे बनते हैं यह और यह Spokes  क्यों बनते हैं

जीवन
शनि ग्रह एक गैसीय ग्रह है इस ग्रह पर कोई  सतह  है  और इसीलिए शनि ग्रह पर  इंसानी जीवन संभव नहीं है लेकिन शनि ग्रह के कुछ उपग्रह ऐसे हैं जहां जीवन के संकेत पाए  जा सकते हैं जिनमें से शनि ग्रह का सबसे बड़ा उपग्रह टाइटन मुख्य है क्योंकि टाइटन पर हमारी पृथ्वी की ही तरह वातावरण पाया जाता है और  इस उपग्रह की संरचना भी हमारी पृथ्वी की संरचना से बेहद मिलती-जुलती है |