शनि ग्रह के मुख्य तथ्य

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शनि ग्रह हमारे सूर्य से छठे नंबर का ग्रह है |

शनि ग्रह हमारे सौरमंडल का बृहस्पति ग्रह के बाद दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है  | शनि ग्रह इतना ज्यादा बड़ा है कि इसका सिर्फ अर्धव्यास ( Radius ) ही हमारी 9 पृथ्वियो  बराबर है |

शनि ग्रह का वातावरण ज्यादातर हाइड्रोजन और हीलियम से भरा हुआ है |  इस ग्रह पर कोई सतह नहीं है लेकिन माना जाता है कि इस की कोर जरूर पथरीली होगी |

शनि ग्रह हमारे सौरमंडल का इकलौता ऐसा ग्रह है जिसका घनत्व पानी से भी कम है शनि ग्रह का घनत्व पानी के घनत्व से लगभग 30% कम है | अगर शनि ग्रह को पानी में डाला जाए तो यह है पानी के ऊपर तैरने लगेगा क्योंकि इस का घनत्व पानी से कम है और यह हमारे सौरमंडल का इकलौता ऐसा ग्रह है जो पानी के ऊपर  तैर सकता है |

बृहस्पति ग्रह और शनि ग्रह का भार हमारे सौरमंडल के ग्रहों के सभी ग्रहों के कुल भार  का लगभग 92%  है |

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि  शनि ग्रह की कोर का भार  हमारी पृथ्वी के मुकाबले लगभग 9 से 22 गुना ज्यादा है |

शनि ग्रह की कोर का तापमान 11700 डिग्री सेल्सियस है और यह सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा का 2.5 प्रतिशत हिस्सा अंतरिक्ष में ही रेडियेट कर देता है |

द्रव्यमान के हिसाब से शनि ग्रह के वातावरण में 96.3 प्रतिशत हाइड्रोजन है और वही 3.25%  हीलियम है |

बृहस्पति ग्रह की तरह शनि ग्रह पर भी बड़े-बड़े बैंड बने हुए हैं लेकिन शनि के बैंड हल्के रंग के हैं और वह बृहस्पति ग्रह के मुकाबले बहुत ज्यादा चौड़े हैं |

सन 1990 में शनि ग्रह पर एक  बड़े तूफान की खोज की गई जिसका नाम द ग्रेट वाइट स्पॉट रखा गया माना जाता है कि यह तूफान  हर 30 साल बाद आता है |

शनि ग्रह पर हमारे सौरमंडल के नेपच्यून ग्रह के बाद दूसरे नंबर पर सबसे तेज हवाएं चलती हैं  वॉयजर स्पेसक्राफ्ट ने इस ग्रह पर चल रही हवाओं की गति 1800  किलोमीटर प्रति घंटा आंकी गई |

शनि ग्रह का Magnetosphere बृहस्पति ग्रह से बहुत छोटा है लेकिन फिर भी शनि ग्रह का  Magnetosphere  तकरीबन 1000000 किलोमीटर दूर तक फैला हुआ है |

शनि ग्रह हमारे सूर्य से 9 AU  की दूरी पर स्थित है यानी कि यह दूरी सूर्य से 1.4 बिलियन किलोमीटर है |

शनि ग्रह 9.68 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से सूर्य का चक्कर लगाता है और सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में यह 10759 दिन का समय लेता है यानी कि शनि ग्रह 29.5 सालों में सूर्य का एक चक्कर पूरा करता है |

शनि ग्रह का  रोटेशन रेट  मापने के लिए कई सिस्टम बनाए गए जो कि इस  ग्रह के लिए अलग-अलग रोटेशन रेट दे रहे थे , जैसे कि एक सिस्टम ने शनि ग्रह के रोटेशनल पीरियड को 10 घंटे 14 मिनट का बताया और वहीं दूसरे सिस्टम ने शनि ग्रह का रोटेशन पीरियड 10 घंटे 38 मिनट और 25.4 सेकंड का बताया तीसरे सिस्टम ने शनि ग्रह का रोटेशन पीरियड 10 घंटे 39 मिनट और 22.4 सेकंड का बताया | इसके बाद सन 2007 में एक रिपोर्ट में अनेकों प्रोब्स से लिया गए  daata के आधार पर शनि ग्रह का रोटेशन पीरियड 10 घंटे 32 मिनट और 35 सेकंड होने का अनुमान लगाया गया यह डाटा cassini Voyager और pioneer जैसे Probes से लिया गया था |

शनि ग्रह का  औसतन तापमान -185 डिग्री सेल्सियस रहता है लेकिन शनि ग्रह पर कुछ इलाके ऐसे भी पाई गई जहां का तापमान  -122 डिग्री सेल्सियस मापा गया और यह स्थान शनि ग्रह के सबसे गर्म स्थानों में शामिल है |

शनि ग्रह के कुल 62 चंद्रमा खोजे गए हैं और इसके अलावा शनि के ऑर्बिट में अनेकों ऐसे छोटे-छोटे पिंड आज भी घूम रहे हैं जिन्हें चंद्रमा का दर्जा नहीं दिया जा सकता |

टाइटन शनि ग्रह का सबसे बड़ा उपग्रह है |

शनि ग्रह के ऑर्बिट और छल्लो में घूम रहे सभी पिंडों के कुल भार का 90% भार सिर्फ टाइटन का ही है |

शनि ग्रह का दूसरा सबसे बड़ा चंद्रमा रिया है यह चंद्रमा इसलिए ज्यादा दिलचस्प है क्योंकि इस इस चंद्रमा के पास भी बिल्कुल शनि ग्रह की ही तरह छल्ले हैं |

शनि ग्रह अपने अनोखे छल्लों  के लिए जाना जाता हैऔर यही चमकीले छल्ले शनि ग्रह को हमारे सौरमंडल का अनोखा ग्रह बनाते हैं शनि ग्रह के छल्ले 6630 किलोमीटर से लेकर 120700 किलोमीटर तक फैले हुए हैं शनि ग्रह के छल्लों की चौड़ाई लगभग 20 मीटर है |

शनि ग्रह के   छल्ले 93% पानी से बने हुए हैं और 7%  Amorphus carbon है |

शनि ग्रह के लिए पहला मिशन सितंबर 1979 में pioneer 11 भेजा गया लेकिन pioneer 11 का Resolution बहुत ही कम था और इसीलिए इस प्रोब से हमें  शनि ग्रह की डिटेल इंफॉर्मेशन नहीं मिल पाई |

नवंबर 1980 में Voyager 1 ने शनि ग्रह को विजिट किया और यह स्पेस मिशन शनि  के लिए पहला हाई रिजोल्यूशन मिशन था , जिसने हमें शनि ग्रह की अनेकों High Resolution Images  भेजी और इसी के चलते हमने शनि ग्रह के अनेकों उपग्रहों  की सतह के बारे में जाना और इसके बाद Voyager 1 को टाइटन के अध्ययन के लिए रवाना कर दिया गया |

Voyager 1 के 1 साल बाद अगस्त 1981 में  Voyager 2 शनि ग्रह को विजिट किया और इसने शनि ग्रह के बारे में हमारी जानकारी और बढ़ाई शनि ग्रह के अध्ययन के बाद Voyager 2 को आगे यूरेनस ग्रह के अध्ययन के लिए रवाना कर दिया गया |

1 जुलाई सन 2004 को Cassini Huygens Space Probe  शनि ग्रह के ऑर्बिट में दाखिल हुआ और इसलिए भी शनि ग्रह के High Resolution Images और डाटा हमें भेजा | इसमें शनि ग्रह पर चमक रही बिजली को ट्रैक किया और हमें यह बताया कि शनि ग्रह पर चमक रही बिजली हमारी धरती पर चमकने वाली बिजली से 1000 गुना ज्यादा ताकतवर है |

इस मिशन से हमें यह भी पता चला कि शनि ग्रह के उपग्रह Enceladus पर 100 से भी ज्यादा गीजर हैं और यहां  की जमीन के कुछ मीटर नीचे ही पानी हो सकता है और यहां आने वाले भविष्य में हमारे रहने लायक जगह बन सकती है Cassini Huygens Space Probe  ने शनि ग्रह की नई रिंग्स भी  खोजी

शनि ग्रह के उपग्रह टाइटन पर भी जीवन की संभावनाएं खोजी जा रही हैं और हो सकता है कि भविष्य में हमारे और भी कई मिशन शनि ग्रह की ओर जाएं वाकई में यहां पर हमारे जीवन से जुड़े कई राज छुपे हो सकते हैं |