यूरेनस ग्रह

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यूरेनस ग्रह हमारे सौरमंडल का सातवां ग्रह है | यह आकार में तीसरा सबसे बड़ा और भार में चौथा सबसे बड़ा ग्रह है | यूरेनस की संरचना बिल्कुल नेपच्यून ग्रह की तरह ही है , लेकिन यूरेनस ग्रह अपने आप में ही एक दिलचस्प विषय है |

इतिहास और खोज
हमारे सौरमंडल के अन्य ग्रहों की तरह यूरेनस को भी हम साधारण आंखों से देख सकते हैं लेकिन प्राचीन काल में यूरेनस को कभी ग्रह के रूप में नहीं देखा गया क्योंकि यूरेनस बहुत कम चमकता है और यह बहुत धीमी गति से सूर्य के चक्कर लगाता है और इसलिए यूरेनस देखने में किसी तारे की तरह दिखाई देता है |

शुरू में सर विलियम हर्शेल ने भी यूरेनस को एक पुच्छल तारा मान लिया था | हर्शेल के अलावा  अनेकों वैज्ञानिक ऐसे थे जिन्होंने यूरेनस को  गलती से तारा समझ लिया था | 13 मार्च 1781 को सर विलियम हर्शेल ने यूरेनस को देखा और इसके बाद उन्होंने कई और बार यूरेनस को देखा लेकिन हर बार सर विलियम हर्शेल ने यूरेनस को एक तारा समझा | ” उन्हें लगता था कि यह वस्तु कोई छोटा तारा या पुच्छल तारा हो सकती है जो शनि ग्रह के बाद हमारे सूर्य का चक्कर लगा रही है बिल्कुल किसी ग्रह की तरह” |

रशिया के खगोल शास्त्री Anders john lexell  वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सर विलियम हर्शेल द्वारा बताई गई वस्तु के ऑर्बिट  का पता लगाना शुरु किया उन्होंने पाया कि यह वस्तु एक गोलाकार ऑर्बिट में हमारे सूर्य का चक्कर लगा रही है जिससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि यह वस्तु कोई तारा या पुच्छल तारा ना होकर ग्रह हो सकता है क्योंकि ग्रह है एक गोलाकार ऑर्बिट नहीं सूर्य का चक्कर लगाते हैं जबकि पुच्छल तारा एक ऐसे ऑर्बिट में सूर्य का चक्कर लगाता है जो बहुत ज्यादा  अंडाकार होती है

बर्लिन के  एक खगोल शास्त्री जॉब अलर्ट बोड ने हर्शेल की खोज को एक चलता हुआ तारा कहा जो कि शनि ग्रह के ऑर्बिट के  पीछे से हमारे सूर्य के चक्कर लगा रहा है  और इसके बाद इस वस्तु को सभी ने पूर्ण रूप से एक ग्रह मान लिया जिसका नाम यूरेनस रखा गया

नाम
इस नई खोज की गई वस्तु  को हर्षल ने इसे Georgium Sidus  नाम दिया जो कि इंग्लैंड के राजा George III  के सम्मान में रखा गया पर इस नाम को ज्यादा  लोकप्रियता नहीं मिल पाई इस नाम को इंग्लैंड के बाहर भी इसे ज्यादा लोकप्रियता नहीं मिली | बाद में बाकी ग्रहों के अनुसार इसका नाम भी ग्रीक मेथोलौजी  के अनुसार यूरेनस रखा गया जिसे  पूरी तरह से स्वीकार कर लिया गया |

बर्फीले ग्रह
संरचना और कंपोजीशन ( Composition ) में यूरेनस ग्रह पूरी तरह से नेपच्यून ग्रह से मिलता-जुलता है लेकिन इन दोनों ग्रहों की रासायनिक कंपोजीशन ( Chemical Composition ) दूसरे अन्य बड़े गैसीय ग्रहों बृहस्पति और शनि ग्रह से बिल्कुल अलग है और यही कारण है कि वैज्ञानिकों ने यूरेनस और नेपच्यून ग्रह को एक अलग वर्ग में रखा है | बृहस्पति और शनि ग्रह को बड़े गैसीय ग्रह कहा जाता है लेकिन यूरेनस और नेपच्यून को  गैसीय ग्रह होने के साथ-साथ बड़े बर्फीले ग्रह भी कहा जाता है |

यूरेनस और नेपच्यून के वातावरण में भी बृहस्पति और शनि ग्रह की तरह हाइड्रोजन और हीलियम पाए जाते हैं लेकिन यूरेनस नेपच्यून पर बर्फ ज्यादा पाई जाती है जो कि पानी अमोनिया और मीथेन की बनी होती है और इसके साथ-साथ कुछ हाइड्रोकार्बन भी पाए जाते हैं किसके वातावरण में  सबसे ऊपर मीथेन के ठंडे बादल पाए जाते हैं , और इसके नीचे पानी के ठंडे बादल भी पाए जाते हैं  | इसका अंदरूनी हिस्सा  बर्फ और चट्टान का बना हुआ है

संरचना
यूरेनस का भार हमारी पृथ्वी से लगभग 14.5 गुना ज्यादा है जो कि सभी बड़े गैसीय ग्रहों में सबसे कम है यूरेनस का व्यास नेपच्यून ग्रह से थोड़ा ज्यादा है यूरेनस ग्रह का घनत्व 1.27 g/cm3 है जो कि इसे हमारे सौरमंडल का दूसरा सबसे कम घनत्व वाला ग्रह बनाता है  | शनि ग्रह के बाद यूरेनस का घनत्व सबसे कम है |

यूरेनस के मॉडल यह दर्शाते हैं कि यूरेनस 3  परतों में बना हुआ है | इसके केंद्र में चट्टानी Core है जोकि सिलीकेट  , निकल और लौह तत्व की बनी हुई है और इसके ऊपर बर्फीली परत मेंटल है | सबसे ऊपर हाइड्रोजन और हीलियम का वातावरण है इसके मेंटल में पाई जाने वाली परत में अनेकों तरह की बर्फ पाई जाती है जिसमें पानी , अमोनिया और मीथेन मुख्य रूप से शामिल है ,लेकिन यूरेनस के अंदरूनी हिस्से में पाई जाने वाली बर्फ का भार कितना है यह हमें पूरी तरह से ज्ञात नहीं है | ऐसा माना जाता है कि इसका भार हमारी पृथ्वी के भार से 9.3 से 13.5 गुना ज्यादा हो सकता है | इसकी कोर का भार हमारी पृथ्वी के कुल भार का सिर्फ 0.5 5% ही है ,और बाहरी वातावरण में पाई जाने वाली हाइड्रोजन और हीलियम का भार हमारी पृथ्वी के बाहर का 0.5 से 1.5  प्रतिशत हो सकता है |

यूरेनस के केंद्र में  दबाव 80 लाख बार ( 80 lakh bar )  तक रहता है और तापमान 5000 केल्विन तक पहुंच जाता है  इसकी मेंटल में जो बर्फ पाई जाती है वह ठंडी ना होकर एक बहुत ही गर्म और  ज्यादा घनत्व वाले तरल पदार्थ  की बनी होती है , जिसमें कि  पानी , अमोनिया और अन्य ज्वलनशील पदार्थ शामिल है | यह तरल पदार्थ हाइली इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी  ( Highly Electric Conductive ) होता है जिसे हम पानी अमोनिया समुन्द्र के नाम से जानते हैं |

वातावरण
जैसे जैसे हम यूरेनस पर अंदरूनी वातावरण से बाहर की ओर आते हैं , तो दबाव और तापमान कम होने लगता है | इसके क्षोभ मंडल के शुरुआती इलाकों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक रहता है लेकिन जैसे-जैसे हम ऊपर आते जाते हैं तो बाहरी वातावरण तक पहुंचते-पहुंचते यह तापमान घटकर-220 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है | बाहरी वातावरण में इस ग्रह पर सबसे कम तापमान -216 डिग्री सेल्सियस से लेकर -224 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया जो कि हमारे सौरमंडल का  किसी ग्रह पर सबसे कम तापमान है |  यूरेनस हमारे सौरमंडल में सबसे कम तापमान वाला ग्रह है | यहां का  सबसे कम तापमान तापमान -224 डिग्री सेल्सियस  दर्ज किया गया

ऑर्बिट और रोटेशन
यूरेनस हमारे सूर्य से लगभग 20 AU दूरी पर स्थित है जो कि लगभग 3 बिलियन किलोमीटर के बराबर है | इस दूरी तक सूर्य की रोशनी को भी पहुंचने में 2 घंटे 40 मिनट का समय लगता है | यूरेनस 84 पृथ्वी वर्षों में हमारे सूर्य का एक ऑर्बिट पूरा करता है | यह अपनी धुरी पर 17 घंटे 14 मिनट में एक चक्कर पूरा करता है |

यूरेनस के ऑर्बिट को लेकर भी बहुत से मतभेद पैदा हुए क्योंकि इसकी ऑर्बिट को लेकर जो भविष्यवाणी की गई थी , यूरेनस असल में वहां पर नहीं था | सन 1841 में जॉन काउच ऐडम्स वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने इस बारे में कहा कि इसके ऑर्बिट में यह अंतर किसी और अनजान वस्तु के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण आ रहा है , जिसे हमने अभी तक खोजा नहीं है और इसके  5 साल बाद अर्विन ली वैरियर ने उस अनदेखी वस्तु को खोज लिया जिसे अब नेपच्यून ग्रह के नाम से जाना जाता है |

झुकाव
हमारे सौरमंडल के बाकी ग्रहों के मुकाबले यूरेनस की रोटेशन बड़ी ही अजीब है लगभग सभी ग्रहों की रोटेशनल एक्सिस ( Rotational Axis ) हमारे सौरमंडल के प्लेन के परपेंडिकुलर ( Perpendicular ) होती है पर यूरेनसऔर ऐसा लगता है कि इसकी रोटेशनल एक्सिस ऑर्बिटल प्लेन के पैरेलल ( Parallel )  है और इस वजह से यूरेनस पर जो मौसम बनते हैं वह हमारे सौरमंडल के किसी भी ग्रह पर बनने वाले मौसम से बहुत अलग होते हैं | एक लम्बे समय के लिए यूरेनस का एक ध्रुव लगातार सूर्य की तरफ रहता है | यूरेनस पर एक बहुत पतली पट्टी है जहां पर बहुत जल्दी दिन और रात होते हैं और इसके अलावा  यूरेनस के  ध्रुवों पर लगातार 42 सालों का दिन होता है और दूसरे ध्रुव पर लगातार 42 सालों के लिए रात |

इस ग्रह का मैग्नेटिक फील्ड भी इसके केंद्र में ना होकर इसकी एक्सिस ऑफ रोटेशन से 60 डिग्री तक झुका हुआ है जो कि एक बर्फीले ग्रह के लिए आम बात है इसी तरह नेपच्यून ग्रह का मैग्नेटिक फील्ड भी झुका हुआ है |

यूरेनस के छल्ले
हमारे सौरमंडल के दूसरे गैसीय ग्रहों की तरह यूरेनस के पास भी अपने छल्ले हैं| यूरेनस ग्रह के छल्ले बहुत ही गहरे काले पदार्थों के बने हुए हैं जो कि कुछ माइक्रोमीटर से लेकर कुछ मीटर तक बड़े हो सकते हैं, यह पार्टिकल्स 10 मीटर के व्यास से लेकर बारीक डस्ट पार्टिकल्स तक हो सकते हैं | यूरेनस की कुल 13 रिंग है जिसमें से सबसे चमकीली रिंग epsilon रिंग है |

इस ग्रह के रिंग सिस्टम के बारे में यह माना जाता है कि इस ग्रह के रिंग सिस्टम के पार्टिकल मूल रूप से यूरेनस के नहीं है रिंग के यह पार्टिकल्स किसी चंद्रमा के हो सकते हैं जो कि किसी  बड़ी टक्कर से अंतरिक्ष में बिखर गए होंगे और इन बिखरे हुए पार्टिकल स्कोर यूरेनस ने  अपने गुरुत्वाकर्षण बल से बांध लिया |

उपग्रह
यूरेनस के कुल 27 उपग्रह अभी तक खोजे गए हैं इन सभी उपग्रहों के नाम शेक्सपियर और पॉप  के नोवेल्स में से लिए गए हैं इस ग्रह के पांच मुख्य उपग्रह मिरांडा एरियल उम्ब्रिअल  टाइटेनिया और ओबेरोन ( Miranda , Ariel , Umbriel , Titania and Oberon ) है बड़े गैसीय ग्रहों में यूरेनस का मून सिस्टम सबसे कम भारी है , अगर हम यूरेनस के  पांच मुख्य उपग्रहों  के कुल भार को नेपच्यून के सबसे बड़े उपग्रह ट्राइटन (Triton)  से मिला कर देखें तो ट्राइटन (Triton) उपग्रह का भार यूरेनस के  पांचों उपग्रहों के कुल भार से ज्यादा है | यूरेनस के सबसे बड़े उपग्रह टाइटेनिया  का अर्धव्यास सिर्फ 788.9 किलोमीटर है जो कि हमारी पृथ्वी के उपग्रह चंद्रमा से आधा है |

मिशन
सन 1977  में लांच किया गया वॉयजर 2 सन 1986 में यूरेनस के पास पहुंचा यह प्रोब  24 जनवरी सन 1986 को यूरेनस के सबसे पास था | उस समय वॉयजर 2 की यूरेनस से दूरी सिर्फ 81500 किलोमीटर थी स्पेसक्राफ्ट में यूरेनस के स्ट्रक्चर इसकी कंपोजीशन और इसके वातावरण को स्टडी किया | इसके अनोखे मौसम और इसके झुकाव का भी भी इस प्रोब ने  निरीक्षण किया  | इसने यूरेनस की उस समय खोजी गई सभी नौ रिंग्स का भी अध्ययन किया और इसके अलावा दो नई  रिंग्स भी खोजी |

वॉयजर 1  यूरेनस के अध्ययन के लिए नहीं भेजा गया क्योंकि उस समय हमने शनि ग्रह के चंद्रमा टाइटन को ज्यादा महत्वपूर्ण माना और उसी हिसाब से वॉयजर 1 को यूरेनस की तरफ नहीं भेजा गया सन 2009 में कैसीनी स्पेसक्राफ्ट को  यूरेनस की तरफ भेजने का प्रस्ताव रखा गया लेकिन अंत में यह प्रस्ताव भी रद्द कर दिया गया क्योंकि सभी वैज्ञानिक कैसीनी स्पेसक्राफ्ट को शनि ग्रह के वातावरण में ही नष्ट करने के पक्ष में थे भविष्य में यूरेनस के लिए मिशन भेजने  के लिए भी काम किया जा रहा है यूरेनस पाथफाइंडर और यूरेनस औरबिटर ( Uranus Pathfinder And Uranus Orbiter ) नाम के मिशन आने वाले भविष्य में भेजे जा सकते हैं

रहस्य
यूरेनस गृह के अनेकों रहस्य अभी सुलझाने बाकी है :-

1 . यूरेनस की अंदरूनी ऊर्जा सभी बड़े गैसीय ग्रहों में सबसे कम है ऐसा क्यों है

2 . यूरेनस नेपच्यून ग्रह से थोड़ा ज्यादा बढ़ा है लेकिन संरचना और  आकार में दोनों ग्रह एक तरह से जुड़वां ग्रह हैं लेकिन फिर भी यूरेनस का तापमान हमारे सौरमंडल में किसी ग्रह का सबसे कम तापमान है आखिर यह फर्क क्यों और कैसे आया यह भी हमारे लिए एक बड़ा सवाल है

3 . नेपच्यून सूर्य से आने वाली ऊर्जा  से लगभग 2.61 गुना ज्यादा ऊर्जा अंतरिक्ष में Radiate कर देता है लेकिन वही यूरेनस सूर्य से आने वाली कुल उर्जा का 1.06 से लेकर एक 0.08 गुणा उर्जा Radiate करता है | इसे समझने के लिए एक कल्पना का सहारा लिया जाता है जो इस प्रकार है कि अतीत में कभी यूरेनस  की टक्कर किसी बड़े ग्रह के आकार  कि किसी वस्तु से हुई होगी और इस  टक्कर से यूरेनस की कोर बिखर कर अंतरिक्ष में उड़ गई और इसकी कोर छोटी  रह गई और उस का तापमान भी काफी कम हो गया | क्या असल में यूरेनस पर ऐसा ही हुआ होगा या फिर हम अभी भी गलत ही सोच रहे हैं | यह कुछ ऐसे सवाल थे जिनके जवाब हमें आज तक नहीं मालूम हुए आशा है कि हम भविष्य में इन सवालों के जवाब जरुर ढूंढ लेंगे |